पालम विहार थाने की पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति अपने आपको आईएएस अधिकारी बताकर लोगों से रुपये ऐंठता है और फर्जी सरकारी कार के साथ अपने किराए के मकान में मौजूद है। पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर दबिश दी तो मकान के द्वितीय तल के बरामदे में एक युवक खड़ा था जो पुलिस को आता देखकर छत की तरफ भागने लगा। पुलिस ने उस युवक को काबू करके उसका नाम पूछा तो उसने अपनी पहचान प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) के रघुईपुर गांव निवासी जय प्रकाश पाठक (31 वर्ष) के रूप में कराई।
गिरफ्तार फर्जी आईएएस जय प्रकाश पाठक ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ में पता चला कि वह खुद को गृह मंत्रालय में आईएएस बताकर लोगों को नौकरी लगवाने, कर्मचारियों का तबादला करवाने और आईएएस पद का रौब दिखाते हुए लोगों से रुपये ऐंठता है। इन रुपयों से खुद के व परिवार के शौक पूरे करता है।
आरोपी से बरामद किया गया सामान
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसके कमरे का निरीक्षण किया तो कमरे में रखी हुई मेज से दो आईडी कार्ड, एक आईडी कार्ड डोरी जिस पर गृह मंत्रालय लिखा हुआ है, एक एनवेलप पत्र जो अतिरिक्त निरीक्षक के स्थानांतरण से संबंधित है, एक फर्जी आर्म्स लाइसेंस, छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक वॉकी टॉकी सेट, एक आयुष्मान कार्ड, तीन आधार कार्ड, एक डेबिट कार्ड, एक पेन कार्ड, दो आईडी कार्ड, एक पासपोर्ट, दो मुहर, एक लाल व नीली बत्ती, 2.50 लाख रुपये नकदी और घर के बाहर खड़ी एक कार जिसके आगे-पीछे भारत सरकार लिखा हुआ है, बरामद की गई।
आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज
आरोपी जय प्रकाश पाठक द्वारा फर्जी अधिकारी बनकर, फर्जी सरकारी गाड़ी, फर्जी आर्म्स लाइसेंस रखने और लोगों से रुपये ऐंठने पर उसके खिलाफ पालम विहार थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड जांचने पर पता चला कि उस पर फर्जी अधिकारी/किसी बड़े अधिकारी का खास बनकर ठगी करने के संबंध में एक मामला उत्तर प्रदेश में भी दर्ज है। पुलिस आरोपी जय प्रकाश पाठक को तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही थी।