बिल्डर की गलती से सोसाइटी अलग कैटगरी में दर्ज की गई थी। इस कारण लोगों को पिछले 11 महीने में तय बिजली के बिल की दर के मुकाबले 30 लाख से ज्यादा बिजली का बिल भरना पड़ा है। जब आरडब्ल्यूए ने बिजली निगम से बिजली के बिल से ज्यादा दर से बिजली का बिल लेने की शिकायत की तो इस बात की जांच की गई।
जांच के बाद पता चला कि बिल्डर ने एक कनेक्शन में सोसाइटी के सभी फेज की बिजली ले रखी है और इस कारण प्रति यूनिट ज्यादा बिल आ रहे हैं। इस साल दस महीनों में लोगों ने कुल 62 लाख 25 हजार 765 रुपया बिजली का बिल जमा किया। जो डीएचबीवीएन के स्लैब के अनुसार 35 लाख 12 हजार 25 रुपये बनताहै। जनवरी से अक्तूबर के बीच लोगों ने 27 लाख 13 हजार 740 रुपये अतिरिक्त देने पड़े हैं।
आरडब्ल्यूए के अनुसार बिजली निगम से शिकायत और जांच के बाद कैटेगरी तो दुरुस्त की जा रही है मगर बिल्डर ने यहां भी लोगों के सिंक फंड का प्रयोग इस शुल्क के रूप में जमा करने के लिए किया है। यह शुल्क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नहीं होता है। जबकि कैटगरी में गड़बड़ी भी बिल्डर की लापरवाही थी। लोग अभी 7 रुपये 82 पैसे प्रति यूनिट बिजली का बिल दे रहे हैं, तो पांच रुपये के आस-पास होना चाहिए । इंपीरिया एस्फेरा सेक्टर 37 सी में अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट का एक हिस्सा जहां 1200 परिवार रहते हैं।
आरडब्ल्यूए पदाधिकारी बोले
बिल्डर ने बिल की कैटगरी बदलने के लिए सात लाख रुपये का शुल्क जमा तो किया है मगर कनेक्शन इंपीरिया के नाम से है मगर यह राशि रखरखाव की कंपनी प्रगति के नाम से र जमा की गई है। हमारे मना करने के बावजूद भी बिल्डर ने इस राशि के भुगतान के लिए सिकिंग फंड का प्रयोग किया है। सिंकिंग फंड निवासियों द्वारा जमा किया गया फंड होता है, जिसका प्रयोग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नहीं कर सकते हैं। बिल की कैटेगरी बिल्डर की गलती थी मगर इसके लिए आरडब्लयूए को संघर्ष करना पड़ा है। - रिंकी सिंह, आरडब्ल्यूुए अध्यक्ष इंपीरिया एस्फेरा