गुरुग्राम। कोरोना काल में संक्रमितों के इलाज के नाम पर ज्यादा रकम वसूलने के मामले में 10 निजी अस्पताल फंस गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर की गई जांच में प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी माना गया है। अब इन सभी के खाते खंगालने की जिम्मेदारी सीए को सौंपी गई है। इसके लिए एक्सपर्ट के रूप में प्रशासन ने सीए नियुुक्ति किए थे। इन्हें भी जांच के दौरान अधिक पैसा लेने की पुष्टि हुई है। अब विस्तार से यह जांच हो रही है कि उपचार के लिए हर चीज का कितना रेट था और कितना अधिक वसूला है। वहीं दूसरी ओर इस खुलासे के बाद निजी अस्पताल संचालकों में अफरा-तफरी मच गई है। वह शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर शिकायतें वापस लेेने के लिए कह रहे हैं। इसकी एवज में उनसे अधिक ली गई राशि को वापस करने को भी कहा जा रहा है।
दो महीने पहले कोरोना संक्रमण के दौरान इलाज के नाम पर अधिक राशि वसूलने के काफी मामले सामने आए थे, लेकिन सरकार और प्रशासन में 20 निजी अस्पतालों की 87 शिकायतें दर्ज हुईं थीं। इनमें से 10 अस्पतालों की 37 शिकायतें प्रथम दृष्टया सही पाई गईं हैं। उन्हीं की प्रशासनिक जांच के बाद सीए के स्तर से जांच की जा रही है, जिसमें सीए यह देख रहे हैं कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाज के लिए विभिन्न सुविधाओं के क्या रेट थे। इनकी एवज में कितनी राशि मरीजों के तीमारदारों से वसूली गई है।
सीए की टीम शिकायत के साथ तीमारदारों से वसूली गई राशि की रसीद और निर्धारित दर का मिलान कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों में डेढ़ से लेकर दो गुना तक का अंतर है। इसमें रूम चार्ज, डाक्टर की कंसलटेंट फीस, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, वेंटिलेटर तथा आईसीयू में रखने का लिया गया चार्च। वहीं दूसरी ओर शासन की ओर से इनके लिए निर्धारित की गईं दर। इन दोनों के मिलान के दौरान काफी अंतर मिल रहा है। कई लोगों से तो दो गुना से अधिक रकम वसूली गई है। इतना ही नहीं दवाएं भी ज्यादा लिखी गईं लेकिन उतनी मरीज इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। ऐसे भी कई मामले इस जांच के दौरान सामने आए हैं।
जिन लोगों की शिकायतें मिलीं थीं, उनकी जांच सिटी मजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की टीम कर रही है। अगले सप्ताह तक रिपोर्ट पूरी हो जाएगी, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. यश गर्ग, जिला उपायुक्त
सिटी मजिस्ट्रेट का कोट
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच पूरी हो गई है। रेट के अंतर और अस्पताल के खातों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी सीए को सौंपी गई है। सीए के स्तर से यह जांच की जा रही है कि कितनी राशि ली जानी चाहिए थी, इसके विपरीत कितनी राशि ली गई है। इतना ही नहीं, जो राशि ली गई, वह अस्पताल के खातों में जमा हुई है या नहीं। इन सभी बिंदुओं पर सीए तथा एक्सपर्ट टीम जांच कर रही है। उनकी जांच के बाद ही इस मामले की रिपोर्ट डीसी को सौंप दी जाएगी।
-सिद्धार्थ दहिया, सिटी मजिस्ट्रेट
इन अस्पतालों के खिलाफ आईं हैं शिकायतें
कथूरिया अस्पताल, कृति अस्पताल, कल्याणी, ममता अस्पताल, उमकल, सेठी, वरदान, चिराग, सरस्वती, सत्यम, पारस, त्रिवेणी, श्री बालाजी, कमला, गीतांजलि, गोविंद आदि अस्पताल।