दुनिया के नक्शे पर आज भारत को नई पहचान मिलेगी। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाइस) में इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आईएसए) सचिवालय की औपचारिक नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद रखेंगे।
इसी के साथ देश में यह अंतरराष्ट्रीय संगठन का पहला सचिवालय होगा। आईएसए के 121 देशों का कामकाज फिर गुड़गांव स्थित इसी सचिवालय से होगा, जहां इन देशों के वैज्ञानिक सौर नीति और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए जुटे रहेंगे।
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितने भी संगठन हैं, उनका सचिवालय अमेरिका या यूरोप में है। यह पहला मौका है, जब किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन का सचिवालय हिंदुस्तान में होगा।
विदेश नीति और कूटनीति की यह सार्थक पहल
30 नवंबर को पेरिस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद ने इसकी अनौपचारिक शुरुआत की थी। विशेषज्ञों की मानें तो यह नई कूटनीति और विदेश नीति की सार्थक पहल है।
रक्षा विभाग के पूर्व सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल रणवीर सिंह कहते हैं कि सुरक्षा और वातावरण के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय संगठन के मुख्यालय विकासशील और अविकसित देशों में नहीं बनाए जाते रहे हैं, लेकिन अब भारत दुनिया के विकसित देशों के साथ तेजी से बढ़ रहा है।
विदेश नीति और कूटनीति की यह सार्थक पहल है। साइबर सिटी और आईटी हब के रूप में पहचान बना चुके शहर को सोलर सिटी के रूप में भी दुनिया में नई पहचान मिलेगी।
सौर ऊर्जा संस्थान में अस्थायी तौर पर काम शुरू हो जाएगा
सौर ऊर्जा के महत्व को देखते हुए कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित 121 देशों की बीच एक समझौता हुआ है, जो कुदरत से मिलने वाली मुफ्त ऊर्जा के स्रोत को आमजन तक पहुंचाने का काम करेंगे।
कौन-सा काम कैसे और किस नीति के तहत किया जाना है, इसकी चर्चा गुड़गांव के सचिवालय में होगा। इन देशों से आने वाले वैज्ञानिक यहां के सौर विशेषज्ञ से तकनीक, प्रौद्योगिकी और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिए नई रणनीति पर चर्चा करेंगे।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक डॉ. ओएस शास्त्री का कहना है कि सचिवालय की नींव के बाद सौर ऊर्जा संस्थान परिसर में अस्थायी तौर पर काम शुरू हो जाएगा। शुरुआती दौर में केवल सौर ऊर्जा के तकनीक और प्रौद्योगिकी पर चर्चा होगी।