गुड़गांव में ऊंची चमचमाती दिखने वाली शीशे की इमारतें शहर के लिए खतरा पैदा कर रही है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) के शीशे को लेकर मानकों में लचीलेपन का फायदा उठाते हुए ऐसी इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई नहीं की जा रही।
शनिवार सुबह मुंबई की एक नामचीन ज्वैलर्स की इमारत में आगजनी की घटना सामने के आने के बाद गुड़गांव की हाईराइज इमारतों पर सवाल उठने लगे है। शहर की व्यवसायिक उपयोग में ली जा रही शीशे की इमारतें मानक पूरे नहीं करती। हाल ही में सेक्टर-32 स्थित एक शीशे की इमारत में आग लगने की घटना में शीशे के पिघलकर गिरने की बात सामने आई थी। जिससे आगजनी के समय हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
गुड़गांव में अधिकतर हाइराइज इमारतों में प्लास्टिक कोटेड शीशे का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन शीशे की क्वालिटी का कोई स्टैंडर्ड का जिक्र नहीं होने के चलते इमारतों में सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन नियमों में लचीलेपन के चलते इन इमारतों का निर्माण कर खतरा बढ़ाया जा रहा है। फायर अधिकारी आईपी कश्यप के अनुसार गुड़गांव में हाल ही में आगजनी की घटना को लेकर फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने भी पनी रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया था। जिसके बाद प्रशासन भी इसे लेकर सर्तक हो गया है।
फायर सुरक्षा उपकरण का बंदोबस्त
शहर में लगातार ऊंची बनती जा रही इमारतों में आगजनी से बचाव के लिए फायर ब्रिगेड के पास सुरक्षा उपकरणों का बंदोबस्त है। 42 मीटर की दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मशीन का उपयोग हाइराइज इमारतों के लिए किया जा रहा है। जिसमें 20 मंजिल तक फायर फाइटिंग की क्षमता है। अधिकारियों के मुताबिक डीएलएफ के फायर स्टेशन 90 मीटर ऊंची हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मशीन है। जिससे शहर में 30 मंजिल तक ऊंची इमारतों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
इनमें दिल्ली, मुंबई से आगे है हम
हाइराइज इमारतों के फायर सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इमारतों में सुरक्षा उपकरणों के मामलों में गुड़गांव की इमारते दिल्ली,मुंबई के मुकाबले अधिक सुरक्षित है। फायर ब्रिगेड के अनुसार 1983 नेशनल बिल्डिंग कोड में हरियाणा सरकार की तरफ से 2005 में किए गए संसोधन के चलते गुड़गांव में 750 हाइराइज बिल्डिंगों में फायर नॉर्म्स पूरे कर रही है।
एनबीसी के तहत प्रशासन के सख्ती के चलते साल में कई बार इन इमारतों का औचक निरीक्षण भी किया जाता है। अधिकारियों का दावा है कि 2005 के मुताबिक मुख्यत: व्यावसायिक उपयोग में ली जाने वाली इमारते पूरी तरह सुरक्षित है।
मुख्य मानक-
-हाइराइज इमारतों में प्रत्येक फ्लोर के अलावा तीन मीटर दायरे में स्प्रीकर सिस्टम लगा होना चाहिए।
-धुएं के लिए डिटेक्टर दुरस्त होने चाहिए। इसकी समय-समय पर जांच की जानी चाहिए।
-हाइराइज बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट सिस्टम होना चाहिए