वैश्विक शहरों में शुमार साइबर सिटी इन दिनों निवेश को आकर्षित करने में सफल नहीं हो रही है। भारत के प्रधानमंत्री के जापान दौरे पर भी गुड़गांव की झोली में कोई नया निवेश नहीं आया।
जबकि गुड़गांव में जापान ने इससे पहले काफी निवेश कर रखा है। वहां की कई कंपनियां गुड़गांव में मौजूद हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति के भारत दौरे पर भी गुड़गांव को कुछ मिलता नहीं दिख रहा है।
गुड़गांव के उद्यमियों का कहना है कि तकरीबन तीन वर्षों से गुड़गांव में विदेशी निवेश नहीं हो रहा है। इसकी बात छोड़ दी जाए तो स्थानीय निवेश करने से भी उद्यमी व पूंजीपति बच रहे हैं।
एनसीआर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष एचपी यादव का कहना है कि गुड़गांव निवेश के मामले में अपनी धार खोता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से गुड़गांव में मारुति कांड हुआ तब से विदेशी निवेशक यहां आने से बच रहे हैं। जो हैं वह यहां सिर्फ खुद को संभाले रखने में ही लगे हुए हैं।
गुड़गांव के उद्यमियों का कहना है कि लेबर अनरेस्ट के कारण यह क्षेत्र पूरी तरह से बदनाम हो गया है। इस कारण यहां कोई आना नहीं चाहता। उनका कहना है कि मारुति कांड उसके बाद गुड़गांव के उद्योगों में लगातार हड़ताल और धरना-प्रदर्शन की घटनाएं हो रही हैं।
इस कारण गुड़गांव का नाम विदेशों में भी खराब हो रहा है। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि विदेशी निवेश नहीं आने से गुड़गांव के उद्योगों में ठहराव की स्थिति है।