करीब 500 फार्च्यून कंपनियों वाले शहर और आईटी हब को भी राज्य सरकार ने स्मार्ट होने का तमगा नहीं दिया। इसे लेकर राजनैतिक और औद्योगिक क्षेत्र में बेचैनी और गुस्सा है।
इससे जुड़े लोगों को लगता है कि सीएम की वजह से करनाल को क्षेत्रवाद का लाभ मिल गया, वरना वह तो किसी सर्वे में था ही नहीं।
दबाव बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने गुस्सा शांत करने के लिए तीसरे नंबर पर गुड़गांव का नाम लिख दिया। लेकिन यह युक्ति कामयाब नहीं हुई। अब इस पर सियासत तेज हो गई है।
रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत ने सीएम मनोहरलाल खट्टर के खिलाफ दिल्ली में मोर्चा खोल दिया है। तीसरे नंबर पर नाम लिखने से एक बात तय है कि अब गुड़गांव को स्मार्ट होने का खिताब नहीं मिलेगा। क्योंकि केंद्र ने हरियाणा से सिर्फ दो नाम ही मांगे हैं।
यह मुद्दा सियासी लड़ाई की जड़ बन गया है। राव इंद्रजीत के मुकाबले फरीदाबाद के सांसद और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने शहर की पैरवी करने में सफल रहे हैं।
अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार से नाराज राव इंद्रजीत केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकय्या नायडू से मिलेंगे। उन्हें बताएंगे कि किस तरह गुड़गांव के साथ राजनीति हुई है। जबकि यह शहर सॉफ्टवेयर व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का हब है। प्रति व्यक्ति आय में गुड़गांव देश में तीसरे नंबर पर आता है। प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाला जिला है।
चमकते-दमकते गुड़गांव वालों को यह नहीं पच रहा है कि आखिर फरीदाबाद और करनाल सुविधाओं में इसके मुकाबले काफी पीछे रहने के बावजूद कैसे आगे निकल गए। जबकि फरीदाबाद नगर निगम इस समय कर्ज में डूबा हुआ है।
वहां पर विकास कार्यों के लिए गुड़गांव नगर निगम ने 150 करोड़ रुपये का कर्ज दिया हुआ है। फरीदाबाद के चयन के लिए वहां जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिनुअल मिशन के होने को मजबूत आधार बनाया गया है। गुड़गांव के लोगों का कहना है कि यह योजना तो करनाल में भी नहीं है, फिर उसे क्यों सबसे ज्यादा नंबर मिले।
विधायक भी हैं हैरान, परेशान
गुड़गांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमेश अग्रवाल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर आगाह कर चुके हैं कि स्मार्ट सिटी परियोजना से गुड़गांव को बाहर रखने का परिणाम काफी नकारात्मक हो सकता है। संभावना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशक इस शहर से दूरी बना लें। अगर ऐसा हुआ तो शहर के विकास पर काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा। स्मार्ट सिटी से गुड़गांव को बाहर करना किसी के गले नहीं उतर रहा है।
‘गुड़गांव को स्मार्ट सिटी न बनाना जनता के साथ नाइंसाफी है। इससे शहर के सभी जन प्रतिनिधि और यहां की जनता आहत है। स्मार्ट सिटी चयन के लिए मानक सिर्फ दिखावे के लिए बनाए गए थे। सबकुछ पहले से ही तय था। आंकड़ों की बाजीगरी करके करनाल और फरीदाबाद को गुड़गांव से ज्यादा नंबर दिए गए।’ -यशपाल बत्रा, सीनियर डिप्टी मेयर।
काउंसिल की रिपोर्ट की अनदेखी:
-फर्स्ट स्मार्ट सिटी काउंसिल ने देश के जिन 20 शहरों में स्मार्ट सिटी बनने की संभावना देखी थी उनमें से गुड़गांव एक है। काउंसिल ने फरीदाबाद को भी जगह दी थी, लेकिन उसके सर्वे में करनाल का नाम तो दूर-दूर तक नहीं था।
पहले से ही स्मार्ट है शहर
गुड़गांव की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का टर्न ओवर सालाना 32,000 करोड़ रुपये है। प्रदेश के कुल राजस्व का करीब 50 प्रतिशत गुड़गांव का हिस्सा है। सॉफ्टवेयर व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का हब है। मारुति, होंडा, हीरो, सुजूकी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां हैं।
ट्रैवेल जी डॉटकॉम के सर्वे में शामिल टॉप-10 शहरों में गुड़गांव छठे नंबर पर था। कनेक्टिविटी फरीदाबाद और करनाल से बेहतर है। शहर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है। देश के नामचीन बिल्डरों की हाउससिंग सोसायटियां इस में जान फूंकती हैं।