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गुरुद्वारा कमेटी पर भ्रष्टाचार के आरोप पर पार्टी हाईकमान गंभीर, जीके सहित 5 ने नहीं दिया त्यागपत्र

Fri, 07 Dec 2018 04:39 AM IST
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुरुद्वारा कमेटी - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोपों पर आखिर अकाली दल बादल हाईकमान ने चुप्पी तोड़ ही दी। हाईकमान ने हालांकि कमेटी के पदाधिकारियों को तुरंत प्रभाव से त्यागपत्र देने का निर्देश दिया था, लेकिन कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने त्यागपत्र देने की अपेक्षा कार्यकारिणी के नए सिरे से चुनाव करवाने का प्रस्ताव पास करवाकर हाईकमान के आदेश का उल्लंघन कर दिया।

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इस मुद्दे को लेकर बैठक में काफी हंगामा भी हुआ और जीके सहित पांच सदस्यों को छोड़कर कार्यकारिणी के 10 सदस्यों ने अपने त्यागपत्र पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल को भेज दिए। इतना ही नहीं त्यागपत्र न देने के विरोध में एक सदस्य हरेन्द्र पाल सिंह तो बैठक छोड़कर ही चले गए।

जीके व उसके साथियों पर पिछले दिनों दिल्ली अकाली दल व कमेटी के सदस्य गुरमीत सिंह शंटी ने करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं जिन लोगों के साथ मिलकर घोटाला किया गया, उन्होंने भी स्वीकार कर लिया कि उन्होंने कमेटी को फर्जी बिल दिए थे। इस मुद्दे को लेकर राजधानी के सिख समुदाय में काफी रोष था। इसके अलावा पार्टी हाईकमान की चुप्पी से भी सिख समाज हैरान था।

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आखिर सुखबीर सिंह बादल ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्यकारिणी के सभी 15 सदस्यों को त्यागपत्र देकर नए सिरे से चुनाव करवाने का निर्देश दिया, ताकि पार्टी की बदनामी को बचाया जा सके। कमेटी प्रधान जीके पर ही सभी भ्रष्टाचार के आरोप लगे, यही कारण है कि जीके को अपने खास महाप्रबंधक को निलंबित करना पड़ा और जांच के लिए कमेटी बनानी पड़ी। जांच कमेटी का अध्यक्ष उपाध्यक्ष को बनाने पर भी सवाल उठे कि क्या उपाध्यक्ष अपने प्रधान के खिलाफ जांच रिपोर्ट दे पाएगा। 

पार्टी हाईकमान के निर्णय के आगे जीके को झुकना पड़ा और संभवत: यह पहला मौका है कि कमेटी की किसी कार्यकारिणी को भ्रष्टाचार के आरोप के चलते समय पूर्व चुनाव करवाने पड़ रहे हैं। इस मामले में दिलचस्प बात यह भी है कि दो वर्ष पहले अपनी साफ छपी के चलते गुरुद्वारा चुनाव जितवाने वाले जीके पर ही सर्वाधिक भ्रष्टाचार के आरोप लगे। 

बैठक के बाद विशेष आमंत्रित सदस्य अवतार सिंह हित, कुलवंत सिंह बाठ व हरेन्द्र पाल ने स्पष्ट किया कि हाईकमान का निर्णय अंतिम है और सभी को त्यागपत्र देने का निर्देश दिया गया है, ऐसे में त्यागपत्र न देना पार्टी के आदेश का उल्लंघन है।

फिलहाल कमेटी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा, वरिष्ठ उपप्रधान हरमनजीत सिंह सहित 10 कार्यकारिणी सदस्यों ने अपने त्यागपत्र पार्टी प्रधान सुखवीर सिंह बादल को भेज दिए हैं, अब जीके पर भी त्यागपत्र का दबाव बन गया है। 
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