आम्रपाली के प्रोजेक्ट में कई निवेशकों ने अपना पैसा लगाया, लेकिन नोटबंदी के बाद ऐसे निवेशक गायब हैं। यह आरोप उन खरीदारों ने लगाया है, जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर आम्रपाली के प्रोजेक्ट में बुकिंग कराई थी। उनका कहना है कि सड़क पर धरना प्रदर्शन से लेकर कोर्ट तक गए हैं, लेकिन हजारों निवेशक, जिनका मूल मकसद पैसा कमाना था। वह हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने इसमें भी किसी तरह के गड़बड़झाले की आशंका जताई है।
2016 के बाद प्रोजेक्ट पर नहीं दिखा कोई
खरीदारों का आरोप है कि 2013 से 2015 तक आम्रपाली का मामला बिगड़ता चला गया। 2016 से आम्रपाली के प्रोजेक्ट पर काम पूरी तरह से बंद हो गया। यहां अब कोई नहीं दिखता। इसके बाद खरीदारों ने धरना प्रदर्शन और कोर्ट की राह ली।
एक पर एक लगातार प्रोजेक्ट लांच से मुसीबत
खरीदारों का आरोप है कि आम्रपाली के निदेशकों ने किसी एक प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से काम नहीं किया, बल्कि एक प्रोजेक्ट लांच करने के बाद उससे आया हुआ पैसा दूसरे प्रोजेक्ट की लांचिंग में लगाते चले गए। इससे आगे यह मुसीबत का रूप लेती गई। इन्हीं पैसों में से निदेशकों ने अपने लिए भी पैसे खर्च किए और कुछ ऐसी भी संपत्तियां खड़ी कीं जो खरीदारों के भले के लिए नहीं थी, बल्कि यह उनकी अपनी संपत्ति बन गई।