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आम्रपाली के 10 फीसद फ्लैट की बुकिंग में गड़बड़झाला, ऐसे हुआ खुलासा

Fri, 07 Dec 2018 04:25 AM IST
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
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आम्रपाली - फोटो : अमर उजाला
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आम्रपाली के खरीदारों ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 46 हजार फ्लैटों में से करीब 10 प्रतिशत फ्लैट की बुकिंग में गड़बड़झाले की आशंका जताई है। खरीदारों का आरोप है कि बिल्डर के नजदीकी लोगों ने शुरुआत में ही अपने नामों से बुकिंग करा ली थी। बाद में मामला पकड़ में आने के बाद विवाद होने पर कुछ साझेदार अलग हो गए।

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आम्रपाली के खरीदार केके कौशल का कहना है कि 2009-10 से आम्रपाली के फ्लैट की बुकिंग शुरू हुई थी। उन्होंने बुकिंग कराई तो उन्हें बताया गया था कि तीन वर्ष में पजेशन दे दिया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा देरी हुई तो छह माह आगे तक का समय मिलेगा, लेकिन 2013 के बाद जब पजेशन नहीं मिला तो उन्होंने मामला उठाना शुरू कर दिया। 2013 से 2015 के दौरान आम्रपाली के प्रोजेक्ट की हालत बिगड़नी शुरू हो गई। 

उनका तर्क है कि एक प्रोजेक्ट लांच करने के बाद जो भी पैसा आता था उसे दूसरा प्रोजेक्ट लांच करने में लगाया जाने लगा। बिल्डर के अपनों ने ही करीब 10 प्रतिशत फ्लैट की बुकिंग इस आशा में कर ली कि कीमत बढ़ने पर फायदा कमाएंगे, लेकिन कीमत नहीं बढ़ी और नोटबंदी का दंश झेलना पड़ा। खास बात यह कि अपनों ने जो बुकिंग कराई थी। 
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उसमें एक से दो लाख रुपये ही दिए थे। जबकि आम खरीदार उसी फ्लैट के 30 से 50 लाख रुपये देकर फंसे थे। इस विवाद के बाद आम्रपाली के कुछ साझेदार अलग भी हो गए थे। ऐसे में करीब 2000 करोड़ रुपये फंस गए। यही वह बेनामी फ्लैट हैं जिसकी खोज चल रही है। जांच पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

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नोटबंदी के बाद कहां गए निवेशक

आम्रपाली के प्रोजेक्ट में कई निवेशकों ने अपना पैसा लगाया, लेकिन नोटबंदी के बाद ऐसे निवेशक गायब हैं। यह आरोप उन खरीदारों ने लगाया है, जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर आम्रपाली के प्रोजेक्ट में बुकिंग कराई थी। उनका कहना है कि सड़क पर धरना प्रदर्शन से लेकर कोर्ट तक गए हैं, लेकिन हजारों निवेशक, जिनका मूल मकसद पैसा कमाना था। वह हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने इसमें भी किसी तरह के गड़बड़झाले की आशंका जताई है।

2016 के बाद प्रोजेक्ट पर नहीं दिखा कोई
खरीदारों का आरोप है कि 2013 से 2015 तक  आम्रपाली का मामला बिगड़ता चला गया। 2016 से आम्रपाली के प्रोजेक्ट पर काम पूरी तरह से बंद हो गया। यहां अब कोई नहीं दिखता। इसके बाद खरीदारों ने धरना प्रदर्शन और कोर्ट की राह ली।

एक पर एक लगातार प्रोजेक्ट लांच से मुसीबत
खरीदारों का आरोप है कि आम्रपाली के निदेशकों ने किसी एक प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से काम नहीं किया, बल्कि एक प्रोजेक्ट लांच करने के बाद उससे आया हुआ पैसा दूसरे प्रोजेक्ट की लांचिंग में लगाते चले गए। इससे आगे यह मुसीबत का रूप लेती गई। इन्हीं पैसों में से निदेशकों ने अपने लिए भी पैसे खर्च किए और कुछ ऐसी भी संपत्तियां खड़ी कीं जो खरीदारों के भले के लिए नहीं थी, बल्कि यह उनकी अपनी संपत्ति बन गई।
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