स्टेंट के दाम में कटौती से साइबर सिटी के मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। स्टेंट की कीमत घटने से इलाज का खर्च भी कम होगा। इससे देश के दूसरे हिस्से से आने वाले मरीजों को फायदा होगा।
वहीं, खाड़ी, अफ्रीकी और अन्य मुल्कों से इलाज के लिए यहां आने वाले लोगों को यूरोप, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया से सस्ता इलाज मिलने के कारण विदेशी मरीजों की संख्या बढ़ेगी। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद यहां के अस्पतालों ने नए सिरे से स्टेंट लगाने की कीमत तय करना शुरू कर दिया है।
एनसीआर के मेडिकल टूरिज्म में साइबर सिटी की भागीदारी सबसे ज्यादा है। अच्छे डॉक्टर और बेहतर सुविधा की वजह से देश के दूसरे हिस्सों के अलावा अफ्रीका व खाड़ी देशों से विदेशी मरीज आते हैं।
यहां के टॉप-10 अस्पतालों में आने वाले मरीजों में दिल के रोगियों की संख्या सबसे अधिक है। जिनमें एंजियोप्लास्टी के जरिये स्टेंट लगाया जाता है। पूरे जिले में 10 हजार से अधिक स्टेंट हर वर्ष लगाए जाते हैं। एक अस्पताल में यहां औसतन 1200 स्टेंट लगाए जाते हैं।
अब यह दर हुए है तय
राष्ट्रीय औषधि मूल्य नियंत्रण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए बेयर मेटल स्टेंट की कीमत 7,260 रुपये और ड्रग इल्यूटिंग एवं बायोडिग्रेडेबल स्टेंट की कीमत 29,600 रुपये तय की है। यहां इस्तेमाल होने वाले 90 फीसदी स्टेंट ड्रग इल्यूटिंग मेटल स्टेंट होता है, जिनका काम धमनियों को दोबारा ब्लॉक होने से रोकना होता है।
अभी तक यह स्टेंट 1.95 लाख रुपये की कीमत पर मिल रहे थे। बता दें कि बायोडिग्रेडेबल स्टेंट से सबसे ज्यादा मुनाफा अस्पतालों को होता था। सूत्रों के मुताबिक इनसे 654 प्रतिशत तक का मुनाफा कमाया जाता है।