सपा में मचे तूफान में महानगर अध्यक्ष की कुर्सी चली गई। महानगर की समस्त इकाईयां भी भंग कर दी गई हैं। जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
रश्मि चौधरी से छेड़छाड़ करने के आरोपी का बचाव करने और हाईकमान को गलत रिपोर्ट भेजना कार्रवाई का कारण माना जा रहा है। हालांकि पार्टी रुटीन प्रक्रिया बता रही है।
छेड़छाड़ और यौन शोषण के कथित आरोपों में घिरे मुरादनगर नगर अध्यक्ष महबूब अंसारी को बचाना पार्टी पदाधिकारियों को भारी पड़ रहा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रही रश्मि चौधरी ने महबूब अंसारी पर छेड़छाड़ और यौन शोषण के आरोप लगाते हुए शिकायत महानगर और जिलाध्यक्ष से की थी।
दोनों नेताओं पर आरोप था कि वह गंभीर आरोपों में घिरे होने के बावजूद महबूब अंसारी का बचाव कर रहे हैं। इससे नाराज रश्मि ने 31 मार्च को मीटिंग को महबूब अंसारी को थप्पड़ जड़ दिए थे।
सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष के इशारे पर महानगर अध्यक्ष धर्मवीर डबास ने हाईकमान को भेजी रिपोर्ट में रश्मि को अनुशासनहीनता का दोषी ठहराया गया। छेड़छाड़ और यौन उत्नीड़न के आरोपों को छिपा लिया गया।
रश्मि और महिला सभा की पूर्व जिलाध्यक्ष मधु चौधरी चार अप्रैल को दिल्ली में मुख्यमंत्री से मिलीं और पूरा मामला बताया। तो सीएम ने रश्मि को पार्टी में वापस लेने के आदेश दिए थे।
पार्टी सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष को हटाने की तैयारी भी कर ली गई है। इसके लिए किसी निर्विवाद अल्पसंख्यक चेहरे की तलाश की जा रही है।
सरकार के दरबार में पहुंचेगा रश्मि-महबूब विवाद
अखिलेश यादव ने जिला संगठन की बिना रिपोर्ट के रश्मि चौधरी की पार्टी में वापसी करने के बाद अब उनको लखनऊ बुलाया है। उनको सच्चाई की जानकारी देने के लिए सीएम ऑफिस बुलावा आया था।
रश्मि चौधरी अपने पक्ष में अमर उजाला में छपी खबरों की कटिंग लेकर लखनऊ रवाना हो गई हैं। वहां बृहस्पतिवार को उनकी सीएम से मुलाकात होगी।
सपा महिला सभा की पूर्व जिलाध्यक्ष मधू चौधरी ने बताया कि जिला संगठन छेड़छाड़ के आरोपी महबूब अंसारी को बचाने का प्रयास कर रहा है। यह महिला कार्यकर्ताओं का अपमान है। महबूब अंसारी के एक लाख की रंगदारी मांगने की ऑडियो टेप भी सीएम को सुनाएंगे।