राजधानी का दिल चांदनी चौक अब घातक विस्फोट की दास्तान सुनाने का केंद्र बन गया है। यहां आने वाले पर्यटक गाइड पारंपरिक इतिहास की जगह विस्फोट के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। कई वर्षों से गाइड के रूप में काम कर रहे इकबाल ने बताया कि अब जो लोग दिल्ली आते हैं, वे लाल किला नहीं देखना चाहते। वे विस्फोट के बारे में पूछते हैं।
पिछले 10 वर्षों से चांदनी चौक में गाइड सोहेल ने बताया कि पहले पर्यटक मुगल बादशाह शाहजहां और उनके वंश के बारे में पूछते थे लेकिन अब उनके सवालों के जवाब उन्हें घटनास्थल पर ले जाकर बताता हैं कि क्या हुआ था? खिलौने बेचने वाले 50 वर्षीय देवेंद्र ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि उनका सामान नष्ट हो गया। अब उन्होंने रिक्शा किराए पर ले लिया है और उसे चलाने लगे हैं। कभी स्ट्रीट फूड स्टॉल चलाने वाले मोहम्मद ताहिर ने कहा कि अब वह भी रिक्शा चला रहा है। स्थानीय निवासी जोगिंदर ने कहा कि लोग अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हुआ था।
धमाके के बाद लाल किला सिर्फ प्रदर्शनी स्थल बनकर रह गया
धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किला परिसर और आसपास के बाजारों में चौकसी बढ़ा दी है। इलाके में पुलिस, बीडीएस टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञ तैनात हैं। इस बीच, लाल किला जो हमेशा पर्यटकों से भरा रहता था, अब सन्नाटा ओढ़े है। लोग अब दूर से ही स्मारक की तस्वीरें खींचते नजर आते हैं। व्यापारी चाहते हैं कि जल्द डर का साया हटे और पुरानी रौनक लौटे।
लगा भूकंप आ गया
ब्लास्ट की आवाज दो किमी दूर तक सुनी गई। आईटीओ चौक पर ब्रेड पकोड़े की दुकान चलाने वाले जतिन ने बताया कि तेज आवाज के बीच ऐसा लगा कि भूकंप आ गया। कुछ देर बाद एक ग्राहक दुकान पर आया, जिसने बताया कि लाल किले के पास कार में ब्लास्ट हुआ है।
दुकानदारों की समझदारी से टली बड़ी दुर्घटना
बीते सोमवार को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके के बाद पुरानी दिल्ली के घड़ी बाजार में भागदौड़ शुरू हो गई। यहां के व्यापारियों की सूझबूझ से भगदड़ जैसे हालात के बीच कोई दूसरा हादसा नहीं हुआ। चाय बेचने वाले प्रदीप ने बताया कि वह रात को चाय बना रहे थे, तभी धमाके की आवाज के बीच लोग भागने लगे। इस बीच कोई गिरता हुआ, तो कोई रोते-बिलखते हुए भाग रहा था। स्थानीय दुकानदारों ने जब यह देखा तो उन्होंने जान की परवाह किए बिना उन्हें सबको शांत कराया और धीरे-धीरे निकलने का रास्ता बताया। अगर सब एक साथ भागते तो कई लोगों की जान जा सकती थी।