सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल खत्म होने के बाद बेरोजगार हुए शिक्षकों का उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के खिलाफ गुस्सा फूटा। बीते चार दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों में चार शिक्षकों ने विरोध स्वरूप शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर अपना सिर मुंडवाया। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मंगलवार को बड़ी संख्या में अतिथि अध्यापक इस प्रदर्शन में शामिल हुए। शिक्षकों ने साफ कर दिया कि जब तक उन्हें राहत नहीं मिलती, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त हो गया है। तब से राहत की मांग करते हुए अतिथि अध्यापक उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि शनिवार को शिक्षा मंत्री ने लिखित में मांगों का प्रस्ताव मांगा था। मंगलवार को कैबिनेट में 58 साल की पॉलिसी एवं अन्य मांगों को पास करने का आश्वासन दिया था। ऐसे में शिक्षकों को उम्मीद थी कि मंगलवार उनके लिए राहत भरा होगा। लेकिन देर शाम तक उनके लिए कोई भी राहत भरी खबर नहीं आई।
ऑल इंडिया गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन सदस्य शोएब राणा ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों के साथ वादाखिलाफी की है। सरकार की ओर से कोई बातचीत नहीं की जा रही है। बड़ी संख्या में अतिथि अध्यापक सड़क पर हैं। जब तक शिक्षकों के लिए पॉलिसी पास नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एक शिक्षक के भरोसे खेल के मैदान में हो रही परीक्षा
सरकारी स्कूलों में इन दिनों परीक्षाएं चल रही हैं। लगभग 25 हजार अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल खत्म हो गया है। ऐसे में कई स्कूलों में काफी बच्चों को एक साथ खेल के मैदान में एक स्थायी शिक्षक के भरोसे परीक्षा आयोजित हो रही है। ऐसा शिक्षकों की कमी के चलते हो रहा है। सरकारी स्कूलों में लगभग 16 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इस तरह से शिक्षकों की कमी के कारण परीक्षाओं पर भी असर पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।