पुराने वाहनों को हटाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 15 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर से पुराने वाहनों को बाहर किया जाना है। ऐसे में पुराने वाहनों की सेल थम गई है और रीसेल बाजार धड़ाम हो गया है।
एनसीआर के लोग पुराने वाहनों को औने-पौने दामो में बेच रहे हैं, इसकेबावजूद, खरीदार नहीं मिल रहा। आरटीओ पर बैठने वाले दलालों ने लोगों को झांसा देकर वाहनों की उम्र घटाने का फर्जीवाडा भी शुरू कर दिया है।
दलाल ये दे रहे झांसा
एनजीटी का तोड़ निकालने के लिए दलालों ने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया है। दलाल इसकेे लिए 20 से 50 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। एनसीआर की गाड़ी की फर्जी आरसी किसी ऐसे जनपद-प्रदेश से बनवा देते हैं, जहां पर रोक नहीं है।
वहां के वाहनों की किसी सीरीज के उस नंबर की आरसी बनाने का दावा कर रहे हैं, जो प्रतिबंधित न हो। ऐसे में ये वाहन एकाएक पकड़ में नहीं आएंगे। हालांकि गहन जांच में इसका खुलासा हो जाएगा।
इस धंधे में लिप्त एक दलाल के अनुसार दिल्ली-एनसीआर से बाहर होने वालों की सूची अफसरों के कंप्यूटर और मोबाइल पर आ जाएगी, जबकि बाहर के जनपदों की सूची में इनको दिलचस्पी नहीं होगी।
... यह है हकीकत
दिल्ली-एनसीआर के लाखों वाहन कार्रवाई की जद में आ गए हैं। एनजीटी ने इन वाहनों को बाहर करने के नियम तैयार करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, यानि दो सप्ताह बाद पुराने बाहर किए जाएंगे। फिलहाल उहापोह की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि अब पुराने वाहन नहीं हटाए जाएंगे।
असमंजस में अफसर
एआरटीओ शेर सिंह यादव के अनुसार परिवहन विभाग के अफसर असमंजस में हैं। उनको समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। मोटर व्हीकल एक्ट में हस्तक्षेप का अधिकार संसद को है।
एनजीटी कोर्ट सीधे परिवहन अफसरों को आदेश कर रही है। ऐसे में अफसर कोर्ट का आदेश मानें या एक्ट को मानें, समझ नहीं पा रहे हैं।
नियमानुसार कोर्ट का आदेश एमवी एक्ट से ऊपर नहीं जा सकता है, जबकि कोर्ट आदेश को तत्काल तामील कराना चाहता है। ऐसे में असमंजस की स्थिति है।
यह हुआ गाड़ियों का हाल
पुरानी गाड़ियों का बाजार धड़ाम हो गया है। रीसेल में गाड़ियों की कीमतों में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है। कोई पुरानी गाड़ी भले ही अभी एनसीआर में तीन-चार साल चल सकती हो, लेकिन कीमत धड़ाम हो गई हैं।
पुराने वाहनों के मालिक इनको औने-पौने दामोें में बेचने की फिराक में हैं। पुरानी कारों का कारोबार करने वालों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।