- फर्जी रजिस्ट्रेशन और टैक्स चोरी पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, देशभर के अधिकारियों को दिया निर्देश, 22 सितंबर को अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन पर सख्ती करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब बायोमेट्रिक-आधारित आधार ऑथेंटिकेशन के बिना कोई नया जीएसटी रजिस्ट्रेशन जारी नहीं किया जाए। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ताओं के पैन और आधार नंबर का दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराए गए।
पीठ ने कहा कि संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में 2,800 फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन सामने आए, जिनसे करीब 15,085 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई। वहीं, 2024-25 में 1,654 फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामलों में 13,109 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला।
कोर्ट ने कहा कि सरकार ने आधार के जरिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने की बात कही थी, लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। पीठ ने देशभर के जीएसटी अधिकारियों को निर्देश दिया कि बायोमेट्रिक सत्यापन के बिना रजिस्ट्रेशन जारी न करें।
हालांकि, अधिकारियों को इस व्यवस्था को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों से कोर्ट को अवगत कराने की छूट दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। कोर्ट ने इससे पहले भी फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने में अधिकारियों की विफलता पर चिंता जताई थी।