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दंगा रोकने वाले किन्नरों को मिलेगा सम्मान

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त्रिलोकपुरी दंगों के वक्त जिन किन्नरों ने सांप्रदायिक सौहार्द्र को कायम करने में अपना योगदान दिया है, दिल्ली पुलिस उन्हें सम्मानित करेगी। गौरतलब है कि लैला सा और उनके ग्रुप ने दंगों के दौरान त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 35 में दंगाईयों को घुसने नहीं दिया था।
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यही नहीं इसके बाद लैला ने हिंदू और मुस्लिमों के साथ मिलकर ब्लॉक की सफाई भी की। दंगों के दौरान अपने समूह के साथ मिलकर लैला ने ब्लॉक 35 में कोई भी बड़ा हादसा होने से बचा लिया। हालांकि लैला की खुद की जिंदगी बहुत मुश्किल भरी रही है।

भाईयों ने लैला को बेइज्ज कर घर से निकाला था

लैला बरेली के गांव हरेरपुर की रहने वाली हैं। लैला को उनके भाईयों ने 19 साल पहले बेईज्जत करके घर से निकाल दिया था। उन्होंने बताया कि कैसे उनके भाई लात मारकर उन्हें खुद से दूर कर देते थे और खुद के पास सोने भी नहीं देते थे।

लैला बताती हैं कि उन्हें इस बात का एहसास है कि परिवार के बिना रहना कितना मुश्किल है। अगर उन्होंने त्रिलोकपुरी दंगों में लोगों को नहीं बचाया होता तो कई लोग बेघर हो गए होते।

लैला के आठ लोगों के परिवार में उनका जन्म दूसरे नंबर पर हुआ था। लैला बहुत छोटी थीं जब उनके पिता का देहांत हुआ, ऐसे में 5 भाईयों के साथ पलने-बढ़ने में लैला को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
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घर छोड़ने के बाद हल्द्वानी पहुंची थीं लैला

लैला बताती हैं कि उनके भाईयों को उनसे बहुत शर्म आती थी और ये जानते हुए भी कि वो एक पुरुष के शरीर में कैद हैं वो कुछ नहीं कर सकती थीं। लोग लैला को चिढ़ाते थे और छेड़ा करते थे पर उनका परिवार इसका विरोध तक नहीं करता था।

इस तरह लैला को लेकर उनके परिवार की शर्मिंदगी बढ़ती जा रही थी। इसी बीच एक दिन उनकी मां ने लैला को घर छोड़ने को कह दिया।

घर छोड़ने के बाद लैला हल्दवानी पहुंची जहां वह किन्नरों के एक समूह के साथ घुलने मिलने की कोशिश करने लगी। लैला बताती हैं कि किन्नर अपने समूह को लेकर बहुत ही सख्त होते हैं और आसानी से किसी बाहरी को अपने समूह में शामिल नहीं करते।
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