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देखिए, स्वच्छता अभियान के बाद राष्ट्रपिता के स्मारक का हाल

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर दो अक्तूबर को शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान खत्म हो गया लेकिन बापू के ऐतिहासिक स्मारक तक नहीं पहुंचा। राष्ट्रीय राजधानी से 60 किलोमीटर की दूरी पर पलवल में स्थित यह स्मारक आज भी सफाई के लिए पुकार रहा है।
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कभी फरीदाबाद जिले का हिस्सा रहे पलवल के रेलवे स्टेशन पर 10 अप्रैल 1919 को अंग्रेजों ने महात्मा गांधी की पहली राजनैतिक गिरफ्तारी की थी।

गांधी उस वक्त रोलर एक्ट के विरोध में पंजाब जा रहे थे। जबकि अंग्रेजों ने उनके पंजाब जाने पर रोक लगा रखी थी। रेलवे स्टेशन पर इस महान घटना की याद में गांधी जी की फोटो लगाकर उसके बारे में लिखा गया है। स्मारक बनाया गया है।

कूड़े के ढेर में बदला स्मारक

प्लेटफार्म नंबर तीन-चार के बीच स्थित स्मारक इस समय कृड़े के ढेर में बदल गया है। उसके अंदर चप्पल बनाने के बाद बचा स्क्रैप रखा गया है। पत्तों और कागजों से पूरा पार्क भरा पड़ा है।

इसी में कुछ लोगों ने अपना अस्थायी आशियाना बना रखा है। लगता है कि इसकी लंबे समय से सफाई ही नहीं हुई। हजारों लोग रोजाना इस स्टेशन से दिल्ली एवं आगरा की तरफ सफर करने के लिए प्लेटफार्म पर जमा होते हैं लेकिन कभी किसी की नजर इस धरोहर की तरफ नहीं पड़ी।

जिस देश में बापू को ब्रांड बनाकर स्वच्छता अभियान शुरू किया गया हो वहां उन्हीं के स्मारक की इतनी बेकद्री देखकर प्रशासन और वहां के समाजसेवियों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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परिसर बना रैन बसेरा

नेताओं ने चमचमाती सड़कों पर चमकती झाड़ुओं के साथ सफाई का पाखंड करते हुए फोटो सेशन तो करवाया लेकिन जहां असल में जरूरत थी वहां पर नजर तक नहीं दौड़ाई।

इस स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के लिए छोटे से स्मारक परिसर को मजदूरों का रैन बसेरा बना दिया गया है। जबकि आसपास जगह की कमी नहीं है।

‘एक सप्ताह पहले मैंने स्मारक परिसर में साफ-सफाई करवा रखी थी। चूंकि प्लेटफार्म पर निर्माण कार्य चल रहा है ऐसे में मजदूरों के बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें वहीं ठहराया गया है। फिलहाल जो गंदगी है उसे साफ कराया जाएगा’। -एके गुप्ता, वर्क्स इंस्पेक्टर, उत्तर रेलवे
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