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हद है: दवा, सैनिटाइजर, ग्लव्स, पीपीई किट और इंसानियत, कुछ तो असली रहने दो

Fri, 28 May 2021 03:43 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

एक ओर कोरोना व उसके प्रभाव के कारण आदमी त्राहिमाम कर रहा है, तो दूसरी तरफ मानवता को शर्मसार करने वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक-एक सांस के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को जब कोई पहले दिलासा देता है और फिर धोखा, तो एक पल के लिए उनका इंसानियत और भगवान पर से विश्वास उठ सा जाता है।

कोरोना काल में एक ओर जहां कोरोना योद्धाओं ने अपनी जान और परिवार की परवाह किए बगैर लोगों के लिए काम किया तो कुछ ऐसी भी घटनाएं सामने आईं जिनके बारे में सुनकर आपके मन में विचार आएगा कि आखिर ये इंसान ही हैं न?

इस दौरान ऐसी कोई चीज नहीं जो नकली बेचे जाने की कोशिश न की गई हो। जीवन रक्षक दवा रेमडेसिविर, सैनिटाइजर, ग्लव्स, पीपीई किट ही नहीं यहां तक कि अग्निशमन यंत्र रंग कर और उसे ऑक्सीजन सिलिंडर के नाम से बेचने के मामले सामने आए हैं। हम आपको कुछ ऐसी ही घटनाओं की जानकारी देने जा रहे हैं ताकि आप आंख बंद कर किसी पर विश्वास न करें और चीजों के उपयोग को लेकर सावधानी बरतें...
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coronavirus - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली और गाजियाबाद में धोकर बेचे जा रहे सर्जिकल ग्लव्स

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दिल्ली के डाबड़ी थाना पुलिस ने कबाड़ी मार्केट व निजी अस्पताल से इस्तेमाल सर्जिकल ग्लव्स को खरीद उसे धोकर सप्लाई करने वाले एक गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दो जगहों पर स्थित गोदामों में दबिश देकर वहां से 848 किलो इस्तेमाल ग्लव्स बरामद किए हैं। पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर धंधा में जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है।

गाजियाबाद के लोनी के ट्रॉनिका सिटी स्थित इस्तेमाल हैंड ग्लव्स को रिसाइकल कर बेचने वाली फैक्टरी पर 5 मई सुबह पुलिस ने छापा मारा है। पुलिस ने फैक्टरी से संचालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फैक्टरी से करीब 15 लाख की कीमत के दो ट्रक हैंड ग्लव्स, चार मशीनें बरामद हुए है। आरोपी दिल्ली के अस्पतालों से इस्तेमाल हैंड ग्लव्स लाकर लोनी रिसाइकल करते थे। पुलिस ने फैक्टरी को सील किया है।
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ऑक्सीजन सिलिंडर के नाम पर बेचा अग्निशमन यंत्र, मरीज की मौत
दिल्ली के द्वारका में मरीज के परिजनों को एक व्यक्ति ने ऑक्सीजन सिलिंडर के बदले अग्निशमन यंत्र दे दिया। जब महिला ने इसका प्रयोग किया तो मौके पर ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने द्वारका सेक्टर 23 थाना पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, कोरोना संक्रमित एक महिला के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर ढूंढ रहे परिजनों को एक व्यक्ति ने 30 हजार रुपये लेकर अग्निशमन यंत्र दे दिया। महिला को जैसे ही इससे गैस देना शुरू किया गया, उनकी हालत बिगड़ती चली गई। कुछ देर बाद ही मौत हो गई। पुलिस से की गई अपनी शिकायत में पीड़ित ने कहा कि उनकी पत्नी कोरोना संक्रमित थी। अस्पताल में बेड न मिलने के कारण उन्होंने पत्नी को घर में होम आइसोलेशन में रखा था। 

एमपी के सतना में इस्तेमाल पीपीई किट बेच रहे
मध्यप्रदेश में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। सतना में इस्तेमाल की गई पीपीई किट बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है । बड़खेरा के इंडो वाटर बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में इस्तेमाल पीपीई किट को धोकर पुनः पैक कर बाजार में बेचने के लिए तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर और वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। समाचार एजेंसी एएनआई ने इसका वीडियो भी पोस्ट किया है। उसमें साफ देखा जा रहा है कि प्लांट में कुछ लोग किट को गर्म पानी में धोकर एक जगह रख रहे हैं और उसे बाजार में फिर से बेचने के लिए बंडल बना रहे हैं। जबकि पूरी दुनिया जानती है कि कोरोना संक्रमण एक दूसरे से फैल रहा है। लोग इस दौरान  सावधानी पूर्वक रह रहे हैं, लेकिन सतना के इस प्लांट में मौत बांटने का काम चल रहा है।

नोएडा: 7 कंपनियों पर नकली सैनिटाइजर बनाने का आरोप
नोएडा की 7 कंपनियों पर नकली सैनिटाइजर बनाने का आरोप है। शिकायत के आधार पर औषधि विभाग ने इनकी गोपनीय जांच शुरू कर दी है। एक व्यक्ति ने विभाग को लिखित शिकायत दी थी। इसमें आरोप था कि 7 कंपनियों में मानक के अनुरूप सैनिटाइजर नहीं बनाया जा रहा है। सस्ते केमिकल्स का प्रयोग कर केवल असली सैनिटाइजर का नाम दे दिया जाता है। इसमें अल्कोहल की मात्रा भी बहुत कम होती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि नकली सैनिटाजर बनाने में विशेष प्रकार के साबुन का प्रयोग किया जाता है। फिर इसमें केमिकल मिलाया जाता है, ताकि अल्कोहल की तरह ही खुशबू आए। इससे लोगों को संदेह नहीं होता है। जबकि, असली सैनिटाइजर में 70 फीसदी अल्कोहल होता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई दुकानदार नकली सैनिटाइजर बेच रहा है तो वह उसका बिल नहीं देगा। ऐसे में उससे बिल लेकर बोतल या शीशी की जांच के लिए गूगल पर कंपनी और लाइसेंस नंबर की जानकारी भी ली जा सकती है। इससे असली और नकली सैनिटाइजर की पहचान की जा सकती है।
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नकली रेमडेसिविर भी बेचे
कोविड-19 महामारी के दौरान कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस द्वारा बरामद किए गए 105 रेमडेसिविर इंजेक्शन जांच में नकली व एक्सपायरी डेट के पाए गए हैं। औषधि विभाग की तरफ से जांच के बाद कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस को इस मामले में रिपोर्ट दी गई है। कालाबाजारी की धाराओं में पूर्व में दर्ज मामले में पुलिस ने अब अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ दी हैं।

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