वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा...हवन-पूजन हो चुका है। पंडित जी से आशीर्वाद लेने और चरणामृत व प्रसाद ग्रहण करने के बाद नामांकन के लिए निकले तो समर्थकों ने जोश के साथ नारे लगाए...हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की। यह नजारा है कभी वामपंथ की राह पर चलकर सियासी रसूख हासिल करने वाले कांग्रेस के उम्मीदवार कन्हैया कुमार के जुलूस का। वे भाषण देते हैं तो कहते हैं--मैं कन्हैया हूं। जेल से लौटा हूं। सियासी विरोधियों से निपटने की कला मुझे आती है। समर्थक फिर पूरे जोश के साथ नारे लगाने लगते हैं-हाथी घोड़ा पालकी...और जुलूस आगे बढ़ जाता है।
सोशल मीडिया के दुलारे
इस सीट की चुनावी जंग गलियों- मोहल्लों और सड़कों के साथ आभासी दुनिया में भी जमकर लड़ी जा रही है। दोनों प्रत्याशी सोशल मीडिया के दुलारे हैं व उनकी टीम के लोग इस माध्यम की अहमियत को भी जानते हैं। पिछले दिनों इंस्टाग्राम पर डाले गए मनोज तिवारी के एक वीडियो को 12 लाख से ज्यादा व्यूज मिले, तो कन्हैया के अकाउंट से दम है कितना दमन में तेरे शीर्षक से जारी रील को 24 घंटे में करीब 15 लाख लोगों ने देखा और सवा लाख ने लाइक भी किया। कोई भी नई रील या पोस्ट सामने आते ही दोनों के समर्थकों में उसे आगे बढ़ाने की जैसे होड़ सी लग जाती है।
पीछा नहीं छोड़ रहा टुकड़े-टुकड़े गैंग
राष्ट्रवाद की पिच पर खेलने में सिद्धहस्त भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर कन्हैया कुमार को उनके जेएनयू वाली वीडियो क्लिप के आधार पर घेरने में जुटी है। पार्टी नेता विभिन्न मंचों पर वीडियो का हवाला देते हुए उनको देशद्रोही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कन्हैया कुमार ने भी इस मुद्दे पर हमलावर रुख अपना रखा है।
उनका सीधा तर्क होता है कि मैंने अगर कुछ गलत किया है तो मैं बाहर क्यों हूं। सरकार ने अब तक जेल में क्यों नहीं डाला। कन्हैया की टीम के सक्षम त्रिपाठी कहते हैं, अब वह बात पुरानी हुई। जनता असलियत जान चुकी है।
सामाजिक समीकरण