ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शाहबेरी गांव की इमारतों को नियमित कर कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार कर दिया है। प्राधिकरण ने साफ किया है कि शाहबेरी के अवैध मकान असुरक्षित हैं। गिरने का खतरा है। उन्हें कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं किया जा सकता है। साथ ही, प्राधिकरण ने शाहबेरी के मकानों पर यूपी रेरा एक्ट लागू होने का दावा भी किया है। इस संबंध में रेरा के सचिव को पत्र लिखकर शाहबेरी के खरीदारों का पैसा ब्याज समेत वापस दिलाने की अपील की है।
प्राधिकरण शाहबेरी गांव के अवैध निर्माण को तोड़ने की तैयारी कर रहा है। प्राधिकरण ने गांव की 450 पांच मंजिला बिल्डिंग और 1053 मकानों को चिह्नित किया है। गांव के खरीदार प्राधिकरण की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री तक मामला पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने खरीदारों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्राधिकरण ने खरीदारों के साथ बैठक कर कोर्ट जाने की सलाह दी। यूपी रेरा से भी मामलों को सुनने की अपील करने का आश्वासन दिया, लेकिन गांव के खरीदार निर्माण को नियमित और मूलभूत सुविधाएं देने की मांग अड़े हैं।
शाहबेरी के मामलों में अब प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने यूपी रेरा को पत्र लिखा है। प्राधिकरण ने कहा है कि शाहबेरी के बिल्डरों ने खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की है। रेरा एक्ट का उल्लंघन कर फ्लैट बेचे गए। इन सभी पर रेरा एक्ट लागू होता है। क्योंकि, जिस समय रेरा एक्ट लागू हुआ था, उस समय सभी प्रोजेक्ट निर्माणाधीन थे। उनको कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ था। सभी प्रोजेक्ट में आठ से अधिक फ्लैट हैं। इसका हवाला देकर प्राधिकरण ने रेरा से शाहबेरी के मामलों को सुनने और आदेश जारी कर खरीदारों का पैसा ब्याज समेत वापस कराने का आदेश जारी करने की अपील की है।
सुनवाई करने से इनकार कर चुका है यूपी रेरा
शाहबेरी के खरीदारों ने यूपी रेरा का दरवाजा खटखटाया था। रेरा की पीठ दो ने सुनवाई भी की, लेकिन बाद में अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर शाहबेरी के मामलों पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। करीब दस शिकायतों का खारिज भी कर दिया गया है। रेरा का कहना है कि शाहबेरी के प्रोजेक्ट लाल डोरा के अंदर हैं। उन पर रेरा एक्ट लागू नहीं होता है। खरीदारों ने इसे रेरा के ट्रिब्यूनल में भी चुनौती दी है।
शाहबेरी गांव के प्रोजेक्ट लाल डोरा के अंदर हैं। जो रेरा के दायरे से बाहर है। रेरा वहां के मामलों को नहीं सुन सकता। इस संबंध में शासन को भी रिपोर्ट भेज दी गई थी।
- बलविंदर कुमार, सदस्य यूपी रेरा