देशभर के सभी क्रिकेट मैदानों में पानी की मासिक और वार्षिक खपत की जानकारी केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) को उपलब्ध करानी होती है जो 18 स्टेडियमों ने नहीं कराई है। सीजीडब्ल्यूए की इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम, कानपुर के ग्रीनपार्क समेत 18 मैदानों की रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए संबंधित प्रबंधकों को 4 हफ्ते का वक्त दिया गया है। अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी। तय समय में जवाब उपलब्ध नहीं कराने पर एनजीटी कड़ी कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में मैदानों की हरियाली भी प्रभावित होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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बंगाल का क्रिकेट एसोसिएशन
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन
तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन
(स्त्रोत : सीजीडब्ल्यूए की रिपोर्ट के अनुसार)
मैदान की सिंचाई के लिए मीठा पानी के उपयोग की मांगी थी जानकारी
एनजीटी ने 19 मार्च, 2025 को दिए अपने आदेश में सभी क्रिकेट स्टेडियमों से यह जानकारी मांगी थी कि वे मैदान की सिंचाई के लिए कितनी मात्रा में एसटीपी उपचारित पानी और मीठा पानी का उपयोग कर रहे हैं।
आदेश में कहा गया था कि हर स्टेडियम को मासिक और वार्षिक आधार पर पानी की खपत, मीठे और उपचारित पानी के अनुपात और उसके स्रोत (जैसे- भूजल, नगर निगम की आपूर्ति आदि) की रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही बताना था कि क्या वे पानी की कमी के बावजूद मीठे पानी का उपयोग जारी रखना चाहते हैं और उनके स्टेडियमों में वर्षा जल संचयन प्रणाली (आरडब्ल्यूएचएस) लगी है या नहीं।