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दिल्ली में आम आदमी की पहुंच से दूर हुईं हरी सब्जियां

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राजधानी में तेजी से बढ़ रही हरी सब्जी की कीमत से यहां के मध्यवर्गीय परिवारों की थाली से हरी सब्जी दूर होती जा रही है। सब्जियों की बढ़ती कीमत से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है।
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व्यापारियों का कहना है कि इन दिनों प्याज, टमाटर, आलू और हरी पत्तेदार सब्जियों की थोक कीमत में औसतन 10-20 प्रतिशत का उछाल आया है। वहीं फुटकर कीमत में 50-150 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

चैंबर ऑफ आजादपुर सब्जी व फल ट्रेडर्स के अध्यक्ष मीठा राम कृपलानी ने बताया कि फुटकर व्यापारियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नियंत्रण ना होने के कारण ही फुटकर व्यापारी मनमानी कीमतें बढ़ा लेते हैं।
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बड़े रिटेल विक्रेता भी बेच रहे महंगी सब्जी

कृपलानी बताते हैं कि वैसे तो सब्जियों की थोक में कीमत 10-20 प्रतिशत तक ही बढ़ी है लेकिन कम आवक का बहाना कर मनमाने दाम वसूल कर रहे हैं। यहां तक कि बड़े रिटेल चेन विक्रेता भी थोक से दुगने-तिगुने दाम पर सब्जियां बेच रही हैं।

कृपलानी ने कहा कि बारिश के मौसम में सब्जियों के दाम बढ़ना बहुत आम बात है। भारी बारिश के कारण सब्जियां खराब हो जाती हैं।

जिसकी वजह से सब्जियों की पूर्ति में कमी आ जाती है और इसी कारण इनके दाम बढ़ जाते हैं। ऐसा कम से कम एक महीने तक चलने वाला है।
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पिछले एक माह में बढ़ गए हैं बेतहाशा दाम

आंकड़ों के अनुसार जुलाई की शुरुआत में प्याज का थोक दाम 16 रु. प्रति‌ किलोग्राम था जो अब बढ़कर 18 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। वहीं परवल का दाम 14 से 22.50 रु प्रति किलो और भिंडी 11 से 15 रुपए किलो  बढ़ गया है।

बता दें कि कैलाश कॉलोनी स्थित सुपरमार्केट में 40 रुपए किलो की प्याज बिक रही है जबकि उसके थोक दाम 17 रुपए हैं। इसी तरह टमाटर, खीरे, लौकी और अन्य सब्जियां भी बड़े मुनाफे के साथ बेची जा रही हैं।

सब्जियों के बढ़ी कीमत से परेशान एक ग्राहक ने बताया कि रविवार को वो अपनी प‌त्नी के साथ सब्जी लेने पास के बाजार में गया तो उनकी कीमत सुनकर उसकी पत्नी ने बोला कि वो मंडी से ही सब्जी ले लेंगे।

वहीं कैलाश नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि सात सदस्यों वाले उनके परिवार का सब्जी का खर्च पिछले एक महीने में 500 से बढ़कर 1000 रुपए प्रति सप्ताह हो गया है।
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