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Green Task: दक्षिणी रिज का जंगल घना बनाने की जिम्मेदारी ईको टास्क फोर्स के हाथ, विशेष इकाई करेगी अंत तक रक्षा

Mon, 20 Jul 2026 04:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली

सार

करीब 3.05 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 2.08 लाख स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे और उनकी सुरक्षा ईको टास्क फोर्स सुनिश्चित करेगी। 
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सांकेतिक चित्र
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विस्तार
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दिल्ली के दक्षिणी रिज क्षेत्र को घने जंगल में बदलने की नई मुहिम शुरू हो गई है। इस बार सरकार ने सिर्फ पौधरोपण पर नहीं, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखकर उन्हें विकसित करने पर जोर दिया है। इसी रणनीति के तहत इस रिज क्षेत्र की जिम्मेदारी ईको टास्क फोर्स को सौंपी गई है। करीब 3.05 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 2.08 लाख स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे और उनकी सुरक्षा भी यही विशेष इकाई सुनिश्चित करेगी। 

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वन विभाग का मानना है कि दक्षिणी रिज क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सामान्य एजेंसियों की तुलना में ईको टास्क फोर्स बेहतर ढंग से काम कर सकती है। यही वजह है कि इस बार पौधे लगाने के साथ उनकी निगरानी, सुरक्षा और जीवित रहने की जिम्मेदारी भी इसी विशेष इकाई को दी गई है। 

क्या है ईको टास्क फोर्स
ह भारतीय प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) की विशेष इकाई है। यह इकाई प्रशिक्षित जवानों और पूर्व सैनिकों के साथ वनों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करती है। देश के कई राज्यों में बड़े वन संरक्षण अभियानों की जिम्मेदारी ये निभाते हैं। 
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लापरवाही पर हर पौधे के लिए 500 रुपया हर्जाना
परियोजना में गुणवत्ता से समझौता रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। यदि पौधों की आपूर्ति करने वाली एजेंसी पहले कभी ब्लैकलिस्ट पाई गई या काम में गंभीर लापरवाही सामने आई तो उस पर प्रति पौधा 500  रुपये का अतिरिक्त हर्जाना लगाया जाएगा। 

  • रखरखाव के दौरान रिज क्षेत्र में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति होगी, ताकि शोर और प्रदूषण न्यूनतम रहे। पूरी परियोजना सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और रिज प्रबंधन बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जाएगी।

मजबूत और स्थानीय पौधों पर फोकस
करीब 6,200 हेक्टेयर में फैले दक्षिण दिल्ली के रिज क्षेत्र में संजय वन, महरौली, वसंत कुंज, छतरपुर और आसोला-भाटी क्षेत्र शामिल हैं। धौला कुआं के दक्षिण से शुरू होकर यह हरियाणा सीमा (फरीदाबाद-गुरुग्राम की ओर) तक फैला हुआ माना जाता है। परियोजना के तहत 2.08 लाख स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। प्रत्येक पौधा कम से कम छह फीट ऊंचा और पर्याप्त मोटाई वाला होगा, ताकि वह दिल्ली की जलवायु और रिज की कठिन परिस्थितियों में तेजी से विकसित हो सके। विभाग का मानना है कि बड़े और मजबूत पौधों से जंगल तैयार होने की प्रक्रिया भी तेज होगी।

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