नगर निगम का सिरदर्द बनी ग्रीन फील्ड और सैनिक कॉलोनी को मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद टेकओवर किए जाने की तैयारी तेज कर दी गई है। दोनों कॉलोनियों को टेकओवर करने से पहले जिला उपायुक्त शनिवार को नगर निगम व हुडा के अधिकारियों की बैठक लेंगे। इस बैठक में कॉलोनियों को टेकओवर करने की प्रक्रिया और समस्याओं पर मंथन किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार निगम प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1962 के दशक में सरकार ने निजी बिल्डर को लाईसेंस देकर कॉलोनी बनाने का अधिकार दिया था। बिल्डर ने ग्रीनफील्ड के नाम से कॉलोनी बसा दी लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई।
बिल्डर लोगों को प्लॉट बेचकर चलता बना। कॉलोनी में सीवर, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं न होने के कारण टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने उसे एनओसी तक नहीं दी। यही कारण है कि कॉलोनी को कंपलीशन प्रमाण पत्र भी नहीं मिल पाया।
निगम प्रशासन का मानना है कि कॉलोनी पर करीब 35 करोड़ रुपये डिफेसियंसी चार्ज बकाया है। यही हाल 1990 के दशक में बसी सैनिक कॉलोनी का है। यहां भी बिल्डर ने मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई हैं।
इस कॉलोनी पर भी ईडीसी (एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज) के रूप में करीब दो करोड़ रुपये बकाया है। दोनों कॉलोनियों की जमीन भी हैंडओवर नहीं की गई है। इस बारे में कई बार संबंधित बिल्डर को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया।
शनिवार को जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में उक्त कॉलोनियों को टेक ओवर करने के बारे में मंथन किया जाएगा। इस बैठक में दोनों कॉलोनियों के प्रधान, हुडा, निगम तथा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी शामिल होंगे।