अनाया की मां ने बताया कि 4 अक्तूबर को जीवन में कभी भूला नहीं पाएंगी। जब अनाया 27वीं मंजिल से 12वीं पर जा गिरी थी। अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उस दिन वह खाना बना रही थी। जहां से अनाया गिरी थी। घटना के बाद लोगों की तरफ से कई प्रकार के संदेश आ रहे थे, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मां की ममता को कोई हरा नहीं सकता। अस्पताल में कटे एक-एक दिन कई सालों जैसे लगे, लेकिन अब उन्हें खुशी है कि अनाया वापस आ गई है। माता लक्ष्मी की कृपा से उन्हें अनाया के साथ ही फिर से जिंदगी मिली है।
घटना स्थल को कराया कवर
अनाया के पिता गौरव भट्ट ने बताया कि जहां से अनाया गिरी थी। उस स्थान को अब कवर करा दिया गया है। कभी भी वह खिड़की खुलती नहीं थी। उस दिन पता नहीं कैसे अनाया ने उसे खोल लिया और वह उससे गिर गई। अनाया के पैर में सर्जरी हुई है। इसके साथ ही सिर पर लगी चोट अब सही हो चुकी हैं। अभी पैर में पट्टी होने के कारण करीब 20 दिन तक वह चल नहीं सकती है। बेड से नीचे गिर न जाए। इसके लिए उसे जमीन पर ही सुलाया जाता है। वह सब को पहचान रही है। परिवार और सोसाइटी के लोगों के सहयोग के कारण ही यह संभव हो पाया है। 20 दिन में करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन अनाया से बड़ा कुछ भी नहीं था। विदेश से भाई के सहयोग ने काफी हिम्मत दी, जिसके कारण मौत को भी अनाया ने हरा दिया।
48 घंटे अनाया के लिए रहे काफी अहम
पहले डॉक्टरों ने कहा कि अनाया के लिए 24 घंटे काफी अहम बताएं थे। 24 घंटे बीत जाने के बाद कोई आराम नहीं मिलने पर डॉक्टरों की टीम ने 48 घंटे बताएं। इतनी ऊपर से गिरने के कारण उसकी कई हड्डियां टूट चुकी थीं। इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण बेटी के शरीर पर काफी चोट आई थीं। उसके पैर की हड्डी, हाथ में चोट, गिर में गुम चोट आई थी। सबसे बड़ी समस्या ये थी कि उसके फेफडों में खून भर गया था, जिसको देखकर चिकित्सकों ने दस दिन तक छोटी सी जान को वेंटिलेटर पर रखा था।
क्या हुई थी घटना
गौर सिटी-2 के 14वें एवेन्यू में गौरव भट्ट अपने परिवार के साथ आर टावर के 27वीं मंजिल पर रहते हैं। 4 अक्तूबर को घर में नौकरी की तलाश में मेल देख रहे थे। बच्ची की मां खाना बना रही थी। उनकी बेटी अनाया फ्लैट में ही खेल रही थी। बच्ची की मां खाना बना रही थी। इस दौरान अचानक बेटी बालकनी में पहुंच गई। बेटी बालकनी से फिसल कर 12वीं मंजिल की बालकनी में गिरी चुकी थी। परिवार वाले फौरन बच्ची को वैशाली के एक निजी अस्पताल में ले गए। बच्ची की गंभीर हालत देखकर पूरे परिवार का रो- रोकर बुरा हाल था।