जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने एनसीआर के राज्यों दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को 5 दिसंबर को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश होने का भी निर्देश दिया। मुख्य सचिवों को बताना होगा कि इन प्रतिबंधों के कारण काम नहीं कर पा रहे दिहाड़ी निर्माण श्रमिकों को किसी तरह के भत्ते का भुगतान किया गया या नहीं।
पीठ ने सोमवार की सुनवाई में दिल्ली की सभी एजेंसियों में तालमेल की कमी पर सख्त नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण समिति जैसे भागीदारों के बीच कोई तालमेल नहीं दिखा है। पीठ ने कहा, आज हम कोई राहत नहीं देने जा रहे। हम 5 दिसंबर को फैसला करेंगे कि राहत दी जाए या नहीं। उस दिन हम एक्यूआई का स्तर देखेंगे। पीठ ने दिल्ली में ट्रकों का प्रवेश रोकने के लिए तैनात किए गए अधिकारियों की संख्या भी पूछी।
रिपोर्ट के अध्ययन के लिए आयोग बनाए अधिकारियों की टीम
पीठ ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को निर्देश दिया कि वह कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्टों के अध्ययन के लिए अधिकारियों की टीम बनाए और जहां प्रतिबंधों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां तत्काल संबंधित अधिकारियों के साथ जरूरी कदम उठाए जाएं। पीठ ने आयोग को जरूरी उपाय लागू करने के लिए सभी विभागों के साथ समन्वय बनाने के भी निर्देश दिए।
सभी प्रवेश केंद्रों पर मानवयुक्त निगरानी हो
सभी भागीदारों में समन्वय की कमी के बारे में पीठ ने कहा, यह सीएक्यूएम की जिम्मेदारी है कि वह ग्रैप-4 के उपाय लागू करने के लिए सभी पक्षों के बीच तालमेल सुनिश्चित करे। इसके अलावा, दिल्ली में सभी प्रवेश केंद्रों पर मानवयुक्त निगरानी अनिवार्य करने के लिए कहा गया है।