-रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में तय लक्ष्य के मुकाबले 7 प्रतिशत से लेकर 99.6 प्रतिशत तक की कमी देखी गई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चरण तीन और चार के दौरान नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की समीक्षा में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और एनसीआर के राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। सीएक्यूएम के ग्रेप मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम ने पाया कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी कई अनिवार्य काम या तो बहुत कम किए या बिल्कुल नहीं किए।
रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में तय लक्ष्य के मुकाबले 7 प्रतिशत से लेकर 99.6 प्रतिशत तक की कमी देखी गई। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि ग्रेप के तहत 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण और विध्वंस स्थलों का निरीक्षण बेहद कम किया। ग्रेप चरण तीन और चार दोनों में ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों में निरीक्षण की स्थिति बेहद कमजोर रही। कई राज्यों में 90 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।
50 से 80 प्रतिशत तक शिकायतें अनसुलझी रहीं
सड़कों की मशीनों से सफाई और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती भी संतोषजनक नहीं पाई गई। दिल्ली और हरियाणा में इन कार्यों में भारी कमी रही, जबकि कुछ राज्यों में जरूरत से ज्यादा काम किया गया, जिससे समन्वय की कमी साफ नजर आई। इसके अलावा, सोशल मीडिया के माध्यम से मिली वायु प्रदूषण संबंधी शिकायतों के निपटारे में भी गंभीर लापरवाही देखी गई। चरण तीन और चार के दौरान दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 50 से 80 प्रतिशत तक शिकायतें अनसुलझी रहीं। यह कमजोर प्रवर्तन और खराब शिकायत निवारण व्यवस्था को दर्शाता है।
नियमों का पालन न करने वालों के होगी उचित कार्रवाई
सीएक्यूएम ने इस मुद्दे को दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों के समक्ष उठाया है और नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि ग्रेप के तहत तय उपायों का सख्ती से और समय पर पालन अनिवार्य है। अधिकारियों ने डीपीसीसी और एसपीसीबी को निर्देश दिया है कि नियमों का पालन न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, चेतावनी दी है कि गंभीर और गंभीर से अधिक वायु गुणवत्ता के दौरान इस तरह की लापरवाही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के प्रयासों को कमजोर करती है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।