सरकार बच्चों को लुभाने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर जल्द ही नकेल कस सकती है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। ये प्रक्रिया पिछले काफी समय से चल रही है। अब इसे अंतिम रुप देने के बाद मंजूरी के लिए पीएमओ भेजा जाएगा।
सरकार ने नियम बना रही एक्सपर्ट कमेटी को विज्ञापन संबंधी दिशा-निर्देश भी शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके तहत अधिक चीनी, नमक और फैट वाले विज्ञापनों पर नकेल कसी जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार आने वाले कुछ दिनों में प्रस्तावित नियमों की ड्राफ्ट ला सकती है।
ऐसे जंक फूड की पहचान करने के लिए इनके रैपर पर अलग रंग का मार्क लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि नियमों में होने वाले बदलावों की संसद से मंजूरी लेनी जरूरी नहीं होगी। वहीं ऐसे विज्ञापनों की निगरानी एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (एएसक्यूआई) करेगा। जबकि एफएसएसएआई इसकी नियामक संस्था के रूप में करेगी कार्रवाई। ऐसे विज्ञापनों की शिकायत एएसक्यूआई और एफएसएसएआई दोनों से की जा सकेगी।
उकसाने वाले विज्ञापन हो सकते हैं गैर कानूनी घोषित
ऐसे विज्ञापनों पर लगाम लगाया जा सकता है, जो बच्चों को जंक फूड खरीदने के लिए उकसाने के तहत नि:शुल्क खिलौने देने की बात करते हैं। सरकार विज्ञापनों में बच्चों को उकसाने को गैरकानूनी भी घोषित कर सकती है। साथ ही इस तरह के विज्ञापनों में बच्चों को नहीं दिखाने का भी प्रस्ताव लाया जा सकता है।