औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने कई सर्विसेज को इंडस्ट्रियल एक्टिविटी का दर्जा देने का निर्णय लिया है। इंडस्ट्रियल एरिया में फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) भी बढ़ाया गया है। इससे ग्राउंड कवरेज में करीब 25 प्रतिशत एरिया बढ़ जाएगा। दिल्ली सचिवालय में फैक्ट्री मालिकों के साथ मंगलवार को दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री सतेंद्र जैन ने मुलाकात के बाद यह जानकारी दी।
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दिल्ली सरकार की इस पहल के अनुसार सॉफ्टवेयर, आईटी, एचआर, एकाउंटिंग, पब्लिशिंग, आर्किटेक्चर, ट्रेवल टूरिज्म, मीडिया, एजुकेशन, पैकेजिंग, रिसर्च, बायोटेक्नोलोजी, वेयरहाउसिंग जैसी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां मास्टर प्लान के इंडस्ट्रियल लैंड यूज के अनुरूप नहीं थीं। इसके चलते कई मामलों में इंडस्ट्रियल क्षेत्र को भी कॉमर्शियल एक्टिविटी के रूप में माना जाता था। स्थानीय निकाय कंवर्जन चार्ज और कॉमर्शियल रेट पर प्रॉपर्टी टैक्स वसूलते थे। अब इससे राहत मिल जाएगी।
व्यापारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे बृजेश गोयल ने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने नौ श्रेणियों में 54 गतिविधियों को औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित करने का रास्ता खोल दिया है। मास्टर प्लान 2021 में संशोधनों की भी मंजूरी मिल गई है।
फ्लोर एरिया को 150 से बढ़ाकर 200 कर दिया गया है। इसका फायदा यह होगा कि 100 वर्गमीटर में चल रही इंडस्ट्री का एफएआर बढ़ने से 200 वर्गमीटर का कवर्ड एरिया मिलेगा। अभी 150 वर्गमीटर ही मिलता है।