फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनजीटी की नजर में खटका दिल्ली सरकार का सम-विषम फॉर्मूला

विज्ञापन
विज्ञापन
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तिथिवार चलाई जाने वाली सम और विषम नंबर की गाड़ियों की योजना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सवाल उठाए हैं।
विज्ञापन


बेंच ने प्राधिकरणों को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना किसी अध्ययन और तैयारी के यह योजना कैसे कामयाब होगी। बेंच ने इस मामले पर अपनी टिप्पणी में कहा कि तिथिवार सम-विषम नंबरप्लेट की गाड़ियों को सड़क पर चलाने की यह योजना लोगों को दो गाड़ियां खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को वायु प्रदूषण के मामले पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से वकील ने जवाब दिया कि तिथिवार सम और विषम नंबर प्लेट का फॉर्मूला बसों पर लागू नहीं है।
विज्ञापन

Trending Videos

एक बस से दस कारों के बराबर प्रदूषण होता है

इसके अलावा बेंच के कई सवालों पर वकील खामोश रहे। इसके बाद ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिल्ली सरकार की ओर से मौजूद वकीलों से कहा कि वे सम-विषम फॉर्मूले से जुड़े सवालों का स्पष्ट निर्देश लेकर अगली सुनवाई में आएं।

बेंच इस फॉर्मूले से संबंधित पूरी नीति जानना चाहती है। मामले की अगली सुनवाई बेंच 6 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान ग्रीन बेंच ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकीलों से कहा कि आप 6000 बसों को सड़क पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या आपको मालूम है कि एक बस से दस कारों के बराबर प्रदूषण होता है।

बिना किसी अध्ययन के आया फॉर्मूला

दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ कितना है। इस बात का जवाब दिल्ली सरकार की ओर से मौजूद वकील नहीं दे पाए। वहीं ग्रीन बेंच ने जब पूछा कि सम-विषम फॉर्मूला लागू करने से पहले सरकार ने दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक को लेकर किसी तरह का अध्ययन किया है।

इस पर वकीलों ने नहीं में जवाब दिया। बेंच ने हैरानी जताते हुए कहा कि बिना अध्ययन के कैसे सम-विषम का यह फॉर्मूला लाया गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का दिल्ली में डीजल वाहनों के पंजीकरण पर रोक के आदेश में दिल्ली सरकार स्पष्टता चाहती है।

सरकार का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर कदम उठाने को तैयार हैं लेकिन स्पष्टता जरूरी है।
विज्ञापन

एनजीटी के आदेश को पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी सरकार

दिल्ली सरकार के प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा का कहना है कि 15 दिसंबर को दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट से डीजल वाहन रजिस्ट्रेशन बंद करने केएनजीटी के आदेश पर स्पष्टता की मांग रखेगी। इससे पूर्व में ट्रकों की रोक को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में कुछ अलग कहा गया। हमें यह स्पष्टता दी जाए कि प्रदूषण के मामले की सुनवाई और उससे जुड़े फैसले एनजीटी करेगी या सुप्रीम कोर्ट।

इससे पूर्व एनजीटी के आदेश पर परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा था कि सरकार एनजीटी के आदेश को पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। सरकार 10 साल पुराने डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पहले ही रोक लगा चुकी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि दिल्ली सरकार को डीजल वाहनों के दिल्ली में रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध का सुझाव जरूर मानना चाहिए। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए एनजीटी के प्रयासों का हम स्वागत करते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें