रामस्वरूप एक मोची हैं। रफी मार्ग पर प्रमुख अखबारों के दफ्तरों वाली बिल्डिंग आईएनएस के सामने लोगों के जूते-चप्पल बनाते हुए उन्होंने जिंदगी के कई दशक गुजार दिए हैं। लेकिन अब उनकी पहचान सिर्फ एक मोची की नहीं रह गई है। वे एक चर्म चिकित्सक बन गए हैं।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग के प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी पहचान में यह बदलाव आया है। गत मंगलवार को एनडीएमसी के सभागार में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसके बाबद उन्हें एक प्रमाण पत्र दिया और उन्हें सम्मानित भी किया। इस प्रमाण पत्र के साथ उन्हें छोटे बक्से के साथ लगभग दो हजार रुपये का सामान भी दिया गया है। उनकी तरह लगभग सौ अन्य लोगों को भी सम्मानित किया गया है।
इस बदलाव के बाद चेहरे पर खुशी के भाव के साथ राम स्वरुप बताते हैं कि अब उनके काम को एक सम्मानजनक पहचान मिल गई है। जूते-चप्पल का काम करने का उनका 'ठीहा' अब उनकी अपनी दुकान बन गई है और वे इसके मालिक हो गए हैं।
इस अवसर पर उन्होंने अपने पीछे एक बड़ा सा बैनर भी लगा दिया है जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्र भी बना हुआ है और उनकी पहचान चरखा भी उनके साथ दिख रहा है। राम स्वरूप ने अपनी दुकान को 'जूते-चप्पलों का ब्यूटी पार्लर' नाम दे दिया है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छता के सपने को राम स्वरूप अपने तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। आगामी दो अक्टूबर को जिस समय देश महात्मा गांधी के 150वीं जयंती मना रहा होगा, सरकार बड़े आयोजन कर रही होगी, इसी तरह के अनगिनत 'ब्यूटी पार्लर' पर राम स्वरुप जैसे स्वच्छता के लाखों सिपाही अपनी जिम्मेदारी निभा रहे होंगे और अपने तरीके से राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दे रहे होंगे।