2011 की जनगणना के बाद आबादी के अनुसार सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। लोगों को घरों के नजदीक स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की योजना है।
इसके लिए जिले में स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। शासन से इसे मंजूरी दे दी गई है। नई जनगणना के अनुसार जिले की आबादी में चार लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इस आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने पर बल दिया गया है।
इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग एक प्रारूप तैयार करेगा। जिसमें एक लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 30 हजार की आबादी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का खाका खींचा जाएगा।
अभी जिले की आबादी लगभग साढ़े 16 लाख है। इस हिसाब से 16 सीएचसी और 55 पीएचसी की जरूरत है। मौजूदा समय में केवल 21 पीएचसी और पांच सीएचसी मौजूद हैं। जिले में प्रति पांच हजार की आबादी पर बनाए जाने वाले उपकेंद्र की संख्या 128 है। इसे भी 329 करना होगा।
जमीन नहीं, कहां बनेंगे स्वास्थ्य केंद्र
शहरी क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता नहीं है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी परेशानी सामने आई है। कई स्थानों पर कब्जा किए जाने की भी शिकायत मिली है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों को खोले जाने में जगह बड़ा रोड़ा बन सकती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके गर्ग भी मानते हैं कि जमीन पर अवैध कब्जा और कम उपलब्धता बड़ी चुनौती है। ऐसे में कई सरकारी कार्यालय व अन्य भवनों के ऊपरी तल पर व्यवस्था किए जाने की योजना बनाई जा सकती है।