प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार मंगलवार से केंद्रीय भंडार, मदर डेयरी, एनसीसीएफ के चलते फिरते वाहनों और स्टोर पर 67 रुपये किलों की दर से प्याज बिकेगी। सोमवार को कई दौर की बैठक के बाद देश भर में कीमतों को काबू करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
केंद्रीय खाद्दय एवं आपूत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 31 दिसंबर तक अतिरिक्त 12 हजार मीट्रिक टन प्याज की खेप आ जाएगी। इसकेबाद कीमतों में कमी आने की संभावना है। खबर लिखे जाने तक 257 टन आयातित प्याज दिल्ली, नैफेड, केंद्रीय भंडार समेत देश भर के राज्यों को भेजी चा चुकी है।
सोमवार को खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों में जबरदस्त उछाल दिखा। खुदरा बाजार और इलाके की मंडियों में प्याज 100 से 160 रुपये तक प्रति किलों की दर से बिक रहा है। जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली की मंडियों में थोक में आयातित प्याज 30 रुपये से 50 रुपये तक में प्रतिकिलो की दर से बिक रहा है। जबकि अलवर प्याज 70 रुपये प्रतिकिलो नासिक की प्याज 80 रुपये प्रतिकिलो में बिक रही है।
बात करें आयातित प्याज और सरकारों की प्याज खरीदी के आकड़ें कि तो 19 दिंसबर से 22 दिसंबर तक दिल्ली सरकार ने आयातित प्याज में कुल 48.10 मीट्रिक टन की खरीदी की है। इस क्रम में केरल सरकार ने 49.89 मीट्रिक टन, आंध्र प्रदेश ने अब तक 131.18 मीट्रिक टन प्याज खरीदा है।
देश को हर महीने औसतन 15 लाख मीट्रिकटन प्याज की जरूरत होती है। इस बार मौसम की मार और असमय बारिश ने प्याज की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया था। इसकेचलते केंद्र सरकार ने अब तक आयात केलिए 42,500 टन प्याज के आर्डर दे दिए हैं।
प्याज की कीमतों ने सरकार की नींद उड़ायी हुई है। इसकेचलते उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय समेत गृहमंत्रालय और स्वयं कैबिनेट सचिव केसाथ मूल्य स्थिरीकरण कोष प्रबंधन समिति (पीएसएफएम) की बैठक में कीमतों की स्थिति की समीक्षा की गई।
सूत्रों की माने आयातित प्याज और स्थानीय फसल की आमद से जनवरी के दूसरे सप्ताह से प्याज केदाम गिरने लगेंगे। क्योंकि सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही महाराष्ट्र नासिक, लाल्सलगांव से प्याज की आमद शुरु हो जाएगी। इसके बाद मध्यप्रदेश और कर्नाटक की फसल भी आने लगेगी इससे कीमतों के उछाल पर अंकुश लग सकेगा।