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कहां है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे?: सड़क पर दौड़ रहे वाहन, गूगल मैप नहीं दिखा रहा राह; असमंजस में मुसाफिर

Wed, 15 Apr 2026 08:45 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग नेविगेशन के लिए गूगल मैप का सहारा ले रहे हैं, लेकिन मैप पर यह रूट उपलब्ध न होने के कारण उन्हें पुराने रास्तों से ही डायवर्ट किया जा रहा है। 
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी से उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भले ही जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका हो और इस पर वाहन फर्राटा भर रहे हों, लेकिन डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म गूगल मैप पर यह अब तक नजर नहीं आ रहा है। इससे यात्रियों और ड्राइवरों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।

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लोग पूछ रहे ये सवाल
दरअसल, एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग नेविगेशन के लिए गूगल मैप का सहारा ले रहे हैं, लेकिन मैप पर यह रूट उपलब्ध न होने के कारण उन्हें पुराने रास्तों से ही डायवर्ट किया जा रहा है। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर भी इस समस्या को उठाया है, जहां लोग पूछ रहे हैं कि जब सड़क खुल चुकी है तो मैप पर क्यों नहीं दिख रही। 

क्या बोल रहे जानकार?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए रोड या एक्सप्रेसवे को डिजिटल मैप पर जोड़ने की प्रक्रिया चरणबद्ध होती है। इसमें सैटेलाइट डेटा, ग्राउंड सर्वे, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की पुष्टि और तकनीकी परीक्षण शामिल होते हैं। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक नया मार्ग मैप पर लाइव नहीं किया जाता। 

कब होगा अपडेट
इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे अभी चरणबद्ध तरीके से खुल रहा है, जिससे इसकी पूरी कनेक्टिविटी और इंटरचेंज पॉइंट्स को फाइनल रूप देने में समय लग रहा है। यही कारण है कि मैपिंग कंपनियां पूरी तरह सत्यापित डेटा मिलने के बाद ही इसे अपने प्लेटफॉर्म पर अपडेट करती हैं। 
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साइन बोर्ड ही सहारा
ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर किसी नए हाईवे को मैप पर आने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय लग सकता है। ऐसे में फिलहाल यात्रियों को साइन बोर्ड और स्थानीय दिशा-निर्देशों के आधार पर ही सफर करना होगा। हालांकि, यह स्थिति अस्थायी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही एक्सप्रेसवे गूगल मैप पर भी दिखाई देने लगेगा, जिससे यात्रियों को नेविगेशन में आसानी होगी और इस हाई-स्पीड कॉरिडोर का पूरा लाभ मिल सकेगा।

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