पैरालंपिक खिलाड़ियों को खेल विभाग विशेष सुविधा देने की योजना बना रहा है। खेल विभाग हुडा के साथ ऐसी योजना पर काम कर रहा है, जिसमें प्रदेश में हुडा की ओर से आवंटित होने वाले प्लॉटों में पैरालंपिक खिलाड़ियों का कोटा तय किया जा सके।
पैरालंपिक खिलाड़ियों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों की सामना करना पड़ता है। इन खिलाड़ियों के जीवन में खेल की अवधि काफी कम होती है और अन्य खिलाड़ियों की अपेक्षा इन्हें सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं।
कई बार देखा गया है कि पैरालंपिक खिलाड़ी तीन से चार वर्ष तक ही अपने खेल को जारी रख पाते हैं और इसके बाद वह धीरे-धीरे खेलों से दूर होने लगते हैं।
हालांकि, पैरालंपिक खिलाड़ियों को पदक तो मिल जाते हैं, लेकिन अन्य प्रचलित खेलों जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी के खिलाड़ियों की तरह उन्हें न तो आर्थिक सहायता मिल पाती है और न ही नौकरी।
ऐसे में खेलों से दूर जाने के बाद उन्हें जीवन यापन करने में खासी दिक्कत होती है। प्रदेश के खेल निदेशक जगदीप सिंह ने बताया कि पैरालंपिक खिलाड़ियों को प्लॉटों की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है।
इसके तहत हुडा की ओर से आवंटित होने वाले प्लॉटों में 10 प्रतिशत कोटा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके पैरालंपिक खिलाड़ियों का होगा।
उन्होंने बताया कि खेल मंत्री अनिल विज से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद मुख्यमंत्री को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है।