बास्केटबॉल में स्वर्ण पदक विजेता युवती ने भारतीय वायु सेना की चयन प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। भारतीय सेना व वायु सेना के डॉक्टरों ने युवती को घुटनों के आपस में टकराने के आधार पर सेवा में शामिल करने से इनकार कर दिया जबकि एम्स व इंडियन स्पाइनल इंजरी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक युवती शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट है।
हाईकोर्ट में याचिका पर जस्टिस कैलाश गंभीर व जस्टिस नाजमी वजीरी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई होगी। याचिका दायर करने वाली रामप्रस्थ गाजियाबाद निवासी युवती प्रतिष्ठा का आरोप है कि वायु सेना व भारतीय सेना के डॉक्टरों ने उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच किए बिना ही उसे घुटने टकराने की समस्या बताकर खारिज कर दिया।
सेना के अधिकारियों से कई बार आग्रह करने के बाद हुई जांच के दौरान डॉक्टरों ने कभी उसके घुटनों में विजिटिंग कार्ड डालकर तो कभी आंखों से देखकर ही उसे मेडिकल ग्राउंड पर खारिज कर दिया।