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गोल्ड मैडेल विजेता युवती ने लगाए गंभीर आरोप

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बास्केटबॉल में स्वर्ण पदक विजेता युवती ने भारतीय वायु सेना की चयन प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। भारतीय सेना व वायु सेना के डॉक्टरों ने युवती को घुटनों के आपस में टकराने के आधार पर सेवा में शामिल करने से इनकार कर दिया जबकि एम्स व इंडियन स्पाइनल इंजरी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक युवती शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट है।
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हाईकोर्ट में याचिका पर जस्टिस कैलाश गंभीर व जस्टिस नाजमी वजीरी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई होगी। याचिका दायर करने वाली रामप्रस्थ गाजियाबाद निवासी युवती प्रतिष्ठा का आरोप है कि वायु सेना व भारतीय सेना के डॉक्टरों ने उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच किए बिना ही उसे घुटने टकराने की समस्या बताकर खारिज कर दिया।

सेना के अधिकारियों से कई बार आग्रह करने के बाद हुई जांच के दौरान डॉक्टरों ने कभी उसके घुटनों में विजिटिंग कार्ड डालकर तो कभी आंखों से देखकर ही उसे मेडिकल ग्राउंड पर खारिज कर दिया।
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डाक्टरों ने बताया फिट

माता पिता द्वारा 2 सितंबर 2014 को वसंत कुंज स्थित आईएसआईसी के अस्थि परीक्षण में युवती को पूरी तरह फिट बताया गया।

फिर 16 सितंबर 2014 को एम्स में उसका परीक्षण करवाया। यहां पर अस्थि विभाग के सर्जन डॉ. बीडी चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में युवती को पूरी तरह फिट बताया।

युवती द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि उसने भारतीय वायु सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के 58वें कोर्स के लिए 23 फरवरी 2014 को परीक्षा दी थी।
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सेना ने अयोग्य बताया

इस परीक्षा के आधार पर उसे डॉक्टरी जांच के लिए बुलाया गया। युवती को परीक्षण के लिए एयर फोर्स सेंट्रल मेडिकल इस्टेब्लिशमेंट के समक्ष रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।

यहां पर 27 अगस्त 2014 को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निवेदिता कटोच ने उसका परीक्षण किया। इसके लिए कोई एक्स-रे आदि नहीं किया गया।

डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में युवती के घुटनों के बीच 10 सेंटीमीटर का गैप बताया। इस रिपोर्ट के मद्देनजर युवती को घुटनों के टकराने और अधिक वजन के आधार पर उसे अयोग्य ठहरा दिया गया।
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