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अगर आप भी खाते हैं इम्पोर्टेड जीएम तेल तो हो जाएं सावधान, हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

Fri, 27 Jul 2018 12:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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फाइल फोटो
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अच्छी सेहत को ध्यान में रखकर यदि आप आयातित खाद्य पदार्थों या ब्रांड को ज्यादा तरजीह देते हैं, तो यह खबर आप ही के लिए है। जिन खाद्य तेल के जरिये आपको सेहतमंद रखने का दावा किया जा रहा है, वही महंगे और ब्रांडेड खाद्य तेल अनुवांशिक रूप से संशोधित यानी जीन मॉडिफाइड (जीएम) हैं। 
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हैरानी यह है कि जीएम पदार्थों पर पाबंदी के बावजूद कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अवैध तरीके से जीएम खाद्य उत्पादों की न सिर्फ बिक्री कर रही हैं, बल्कि ग्राहकों को जीएम की मौजूदगी की जानकारी भी लेबल पर मुहैया नहीं करा रही हैं।

बृहस्पतिवार को यह खुलासा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने किया है। सीएसई के मुताबिक, उन्होंने अपनी खाद्य प्रयोगशाला में करीब 65 घरेलू रूप से उत्पादित और आयातित खाद्य तेलों और पदार्थों व शिशु खाद्य पदार्थों में जीएम की मौजूदगी का परीक्षण किया है।
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अमेरिका, कनाडा, नीदरलैंड, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात से आयातित
सीएसई के मुताबिक, इन खाद्य उत्पादों को परीक्षण के लिए दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और गुजरात में खुदरा दुकानों से खरीदा गया था। ज्यादातर खाद्य पदार्थ अमेरिका, कनाडा, नीदरलैंड, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात से आयातित हैं। 

जिन खाद्य तेल, शिशु भोजन और खाद्य स्नैक्स का परीक्षण किया गया, वे सोया, कपास बीज, मकई और रैपसीड (कैनोला) से बने थे। यही उत्पाद प्रमुख रूप से जीएम फसलों के रूप में उगाए जाते हैं। खाद्य तेल, स्नैक्स व प्रोटीन सप्लीमेंट में इनकी मौजूदगी रहती है।

सीएसई के मुताबिक, 65 खाद्य पदार्थों के परीक्षण में 32 फीसदी में जीएम की पुष्टि हुई। इसमें 17 फीसदी भारतीय घरेलू खाद्य उत्पाद थे, बाकी 80 फीसदी जीएम खाद्य पदार्थ आयातित थे। 

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि दुनिया के कई देशों में जीएम खाद्य उत्पादों की बिक्री की छूट है। हालांकि खाद्य पदार्थ में जीएम की मौजूदगी का बेहद मामूली प्रतिशत ही तय है। 

जीएम का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा और यह कितने सुरक्षित हैं ऐसी कोई स्पष्ट अध्ययन रिपोर्ट अभी भारत में नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक इसके उपभोग से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों का खतरा पैदा हो सकता है। 

सीएसई के उप-महानिदेशक चंद्र भूषण ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधीन जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी (जीईएसी) की मंजूरी को छोड़कर किसी भी अनुवांशिक रूप से परिवर्तित खाद्य उत्पाद के आयात, निर्यात, परिवहन, निर्माण, प्रक्रिया, उपयोग या बिक्री पर सख्त प्रतिबंध है।

एफएसएसएआई ने जारी की है अधिसूचना
विषाक्त पदार्थों के कार्यक्रम निदेशक अमित खुराना का कहना है कि खाद्य पदार्थों पर की जाने वाली लेबलिंग को लेकर एफएसएसएआई की ओर से एक मसौदा अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें जीएम खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया गया है। 

इस अधिसूचना में कहा गया है कि जिस खाद्य पदार्थ में पांच फीसदी या उससे अधिक जीएम अवयवों की मौजूदगी है उनमें लेबलिंग की जाएगी, जबकि जीएम अवयव के लिए 5 फीसदी की सीमा अन्य देशों के मुकाबले बेहद ज्यादा है। 

यूएस और ब्राजील में एक फीसदी या उससे नीचे ही जीएम की मौजूदगी का प्रावधान है। सरकार खुद मानती है कि जीएम की मौजूदगी को हर खाद्य पदार्थ में मापना बेहद खर्चीला और समयावधि वाला है। ऐसे में कंपनियां स्वघोषणा करें।
 
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इन उत्पादों में जीएम
कैनड्रॉप, फेरैल, हडसन, जीवो के कैनोला तेल और अंकुर, गिन्नी, तिरुपति, विमल ब्रांड कपास बीज तेल व पैकेज फूड में आंट जेमिमा का वास्तविक सीरप और करो ब्रांड का डॉर्क कॉर्न सीरप, अमेरिकन गार्डन का पिनेकल सीरप, पॉपकॉर्न हॉट एन स्पाइसी व कैलॉग्स ब्रांड के फ्रूट लूप्स (मल्टीग्रेन सीरेल), बगलस ब्रांड का क्रिस्पी कॉर्न स्नैक्स, मिस्टर क्यूबिसन्स ब्रांड का बटर एंड गार्लिक ब्रेड, ट्रिक्स ब्रांड का कॉर्न पर्फ (नैचुरली फ्रूट फ्लेवर्ड स्वीटेंड), मोरी-नू सिलकेन टोफू (एक्सट्रा फर्म), प्रॉम प्ल्स का स्वीट होल क्रेनेल्स कॉर्न व शिशु भोजन में 24 महीने तक बच्चों के लिए सिमिलेक ब्रांड का सोय इन्फैंट फॉर्मूला (लैक्टोज फ्री इन्फैंट मिल्क सब्सटीट्यूट), सोय इन्फैंट फॉर्मूला और सिमिलेक इनफैंट फॉर्मूला उत्पादों में जीएम शामिल है।
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