67वीं वार्षिक पुष्प प्रदर्शनी हुई आयोजित, फूलों की विभिन्न प्रजातियों से महक उठा परिसर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चारों तरफ हरे भरे पौधे, फूल और हैगिंग बॉस्केट, विदेशी ऑर्किड और हर्बल पौधे और उन्हें निहारते छात्र। यह नजारा राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का नहीं बल्कि डीयू के गौतमबुद्ध शताब्दी उद्यान का था। डीयू में शुक्रवार को 67वीं वार्षिक पुष्प प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान की झलक मिली। इस प्रदर्शनी में फूलों की विभिन्न प्रजातियों से पूरा डीयू परिसर महक उठा।
बोनसाई, कैक्टस, मौसमी फूलों, रंग बिरंगी फूल व पौधों की टोकरियां, विदेशी ऑर्किड और हर्बल पौधों और विभिन्न कॉलेजों के पौधों ने सभी का ध्यान खींचा। प्रदर्शनी में विभिन्न श्रेणियों में 54 कप के लिए प्रतिस्पर्धा भी हुई। डीयू के उत्तरी परिसर स्थित गौतमबुद्ध शताब्दी उद्यान में शुक्रवार को 67वीं पुष्प प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन डीयू कुलपति प्रो योगेश सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों से व्यापारिक संभावनाओं की जानकारी भी मिलती है। यह कार्यक्रम एक अद्वितीय मंच है, जहां से सभी को कुछ न कुछ अच्छा मिलता है।
पुष्प प्रदर्शनी में दिल्ली एनसीआर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 68 कॉलेजों, संस्थानों और छात्रावासों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में टिकाऊ प्रथाओं हेतु शुरू किया गया शताब्दी कप इस बार मिरांडा हाउस कॉलेज ने जीता। पुष्प प्रदर्शनी में राष्ट्रपति भवन की प्रदर्शनी ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया। कुलपति ने पुष्प प्रदर्शनी के विषय फ्लोरा एंड फैब्रिक पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में हथकरघा अहम योगदान देगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र को विशेष बल मिलेगा।
फ्लावर शो की अध्यक्ष प्रो. रजनी अब्बी ने कहा कि फ्लावर शो रचनात्मकता को बढ़ावा देने, नवाचार को बढ़ावा देने और समाज की भलाई के लिए सामुदायिक जुड़ाव के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस अवसर पर डीयू उद्यान समिति की अध्यक्ष प्रो रूपम कपूर दक्षिणी परिसर के निदेशक प्रो श्रीप्रकाश सिंह, कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता सहित अनेक प्रिंसिपल, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।
विभिन्न श्रेणियों में 54 कप के लिए हुई प्रतिस्पर्धा
पुष्प प्रदर्शनी में दिल्ली एनसीआर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 68 कॉलेजों, संस्थानों और छात्रावासों नी भाग लिया। इनमें विभिन्न श्रेणियों में 54 कप के लिए प्रतिस्पर्धा हुई। मालियों को सम्मानित करने के लिए विशेष पुरस्कारों की स्थापना भी की गई थी। टिकाऊ प्रथाओं के लिए कॉलेज को पुरस्कृत करने के लिए गठित शताब्दी कप इस बार मिरांडा हाउस कॉलेज ने जीता। राष्ट्रपति भवन की ओर से पौधों का प्रदर्शन किया गया। जिसमें जैविक सब्जियों और विदेशी फूल शामिल रहे। महाकुंभ मेले को प्रदर्शित करने वाली शानदार पुष्प प्रदर्शनी ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
पद्मश्री लाजवंती रविंदर ने दिखाया फुलकारी बनाने का कौशल
पुष्प प्रदर्शनी में फूल-पौधे ही दिखाई नहीं दिए बल्कि छात्रों को फुलकारी बनाने का कौशल भी देखने को मिला। फुलकारी कारीगर पद्मश्री लाजवंती रविंदर ने विभिन्न रेशों का उपयोग करके सुंदर फुलकारी बनाने के कौशल का प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध हथकरघा बुनकर प्रवीण कुमार तिवारी ने जूट, कपास और ऊन जैसे टिकाऊ रेशों का उपयोग करके बुनाई की कला का प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के ब्लॉक प्रिंटिंग कारीगर सुजीत कुमार ने पौधे-आधारित रंगों का उपयोग करके छपाई की तकनीक का प्रदर्शन किया।
हथकरघा ड्रेपिंग प्रतियोगिता आयोजित
पुष्प प्रदर्शनी में हथकरघा ड्रेपिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें 25 युवक और युवतियों ने समकालीन शैलियों में हथकरघा ड्रेपिंग में अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा और सिक्किम सहित आठ राज्यों (सात बहनें और भाई) की पारंपरिक पोशाक का प्रदर्शन किया गया था। छात्रों ने इन राज्यों की पारंपरिक पोशाक पहनी थी और भांग, केला, बांस आदि जैसे प्राकृतिक पौधे आधारित रेशों से कपड़े का निर्माण भी प्रदर्शित किया था।