शुक्रवार सुबह बीके-हार्डवेयर रोड स्थित इंडियन बैंक के बाहर लोगों ने हंगामा कर दिया। कोई सुबह 4 बजे से तो कोई 9 बजे से लाइन लगाए खड़ा था। बैंक से पैसा नहीं मिला तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया। बैंक के अधिकारियों ने बाहर आकर लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा जारी रहा।
बैंक प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। गुस्साए लोगों का आरोप था कि सुबह चार बजे टोकन बांटने का क्या औचित्य है। जो कोई सुबह आठ बजे बैंक की लाइन में लगेगा क्या उसे पैसा नहीं मिलेगा। नाराज लोगों ने बैंक प्रबंधन पर मनमानी करने का आरोप लगाया।
ऐसे ही एक गुस्साए व्यक्ति ने दुखी हो कर कहा कि घर में दो दिन से आटा नहीं है, बच्चों को क्या खिलाऊं। बैंक वालों...जहर खाने के लिए पैसा तो दे दो। पिछले तीन दिन से एनआईटी पांच स्थित विजया बैंक के धक्के खा रहे महेश कुमार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
सब्र का बांध टूटा तो उन्होंने लाइन तोड़कर बैंक में घुसने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर खड़े पुलिसकर्मी ने रोक दिया। नोटबंदी से बिगड़ी बैंकिंग प्रणाली से नाराज महेश दरवाजे पर खड़े गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन बैंक प्रबंधन को आम आदमी की परेशानी से क्या लेना देना था।
लाइन में सुबह से खड़े लोगों का दिल भी पसीज गया।
नाराज लोगों को समझाते पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
लाइन में सुबह से खड़े लोगों का दिल भी पसीज गया। लाइन से चिल्लाकर लोग महेश को बैंक के अंदर जाने देने की आवाज लगाते रहे, इसके बाद उन्हें बैंक के अंदर जाने का मौका मिला लोगों का कहना था कि बैंक के बाहर कैश न होने का न तो कोई नोटिस लगाया जाता है और न ही जानकारी दी जाती है।
लोग घंटों लाइन में खड़े होकर समय बर्बाद कर वापस चले जाते हैं। बैंक की तरफ से कुछ लोगों को वीआईपी सुविधा दी जाती है। लाइन में खड़े मनोज ने बताया कि पैसा जमा करने के लिए भी टोकन लेना पड़ रहा है, जिसके पास टोकन नहीं होता उसे वापस लौटा दिया जाता है।
मैं खुद दो दिन से पैसे लिए घूम रहा हूं। सुरेश कुमार ने बताया कि बैंक वाले बड़ी राशि वालों को पहले बुला रहे हैं, हमें भी पैसे जमा कराने हैं लेकिन हमारी रकम कम है। पुलिस ने लोगों को समझाबुझाकर शांत कराया।