दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा अगर किसी संस्थान से पास होकर विदेश की कंपनी के लिए काम करते हुए एक करोड़ का पैकेज हासिल करता है तो उसे सेलिब्रेट करने का कोई मतलब नहीं है। अगर 100 में से 90 ने पढ़ाई के बाद अपना उद्यम शुरू किया और एक भी विद्यार्थी अगर इस लायक तैयार हो जाता है कि वह 2000 लोगों को रोजगार देने में सक्षम है तो उसे सेलिब्रेट करना चाहिए। देश के लिए जान देने वालों के साथ साथ बेरोजगारों की फौज में से कुछ लोगों को रोजगार देने वाला भी देशभक्त है।
रविवार को कंस्टिट्यूशन क्लब में चैंबर बाफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री की वुमेन काउंसिल के लांच के मौके पर उप मुख्यमंत्री ने ये बातें कही। सिसोदिया ने कहा कि बढ़ती बेरोजगार से निपटने के लिए पढ़ाई को लेकर मानसिकता बदलने की जरूरत है। खुद को ऐसा बनाएं ताकि दूसरों को सक्षम बना सकें। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में लड़कियों की शिक्षा और कैरियर बनाने को लेकर कैरियर काउंसलर्स ने बातचीत की तो अधिकतर का कहना था कि उन्हें घरों में कहा जाता है कि अच्छी पढ़ाई कर लेने के बाद शादी अच्छे लड़के से हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है, क्योंकि लड़कियां और महिलाएं कई क्षेत्रों के साथ साथ उद्यमिता के लिहाज से भी काफी आगे हैं।
सरकारी स्कूल में शुरू होगा एंटप्रन्योशिप पाठयक्रम
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जल्द एंटरप्रेन्योरशिप करिकुलम की शुरुआत की जाएगी। इसमें उपलब्धियां हासिल करने वाली विदेशी महिलाओं की बजाय अपने देश, शहर और पड़ोस की महिलाओं को रोल मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा ताकि लड़कियां प्रेरित हो सके। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने कहा कि आप सभी प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई।
दिल्ली के स्कूलों में ऐसे छह लाख बच्चे हैं, जिनकी मानसिकता में इस एंटरप्रेन्योरशिप क्लासेज से व्यापक बदलाव आएगा। हैपिनेस क्लास से भी स्कूली विद्यार्थियों को काफी फायदा मिल रहा है। शिक्षा मंत्री ने पीएचडी की पढ़ाई के बाद भी नौकरियों के लिए आवेदन करने पर चिंता जताते हुए कहा कि यह एक चुनौती है। नौकरियां काफी कम हैं, ऐसे में शिक्षा को इस तरीके से बनाया होगा ताकि खुद के साथ साथ दूसरों को भी छोटे या बड़े स्तर पर रोजगार देने लायक विद्यार्थियों को तैयार किया जा सकें।