मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय पर सीबीआई छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेज मामले में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार ने स्वयं को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं व सीबीआई ने गलत तरीके से उनको पक्ष बनाया है।
अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर उन्हें मामले से अलग कर दिया। वहीं सीबीआई को बरामद मूल दस्तावेज की प्रतियां दिल्ली सरकार व अदालत को सौंपने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति पीएस तेजी ने सोमवार को मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद समयाभाव के कारण मामले की सुनवाई 29 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पूर्व सुनवाई के दौरान राजेन्द्र कुमार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके कार्यालय में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के कार्यालय से जब्त फाइलों व दस्तावेज से उनका कोई लेनादेना नहीं है।
दस्तावेज पर पेंसिल से लिखा गया था और उसे रबर से मिटाया गया है
यह मामला दिल्ली सरकार व सीबीआई के बीच का है। ऐसे में सीबीआई ने उनको गलत तरीके से दिल्ली सरकार के साथ पक्ष बनाया है। अत: उनको मामले से अलग किया जाए। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर उनको मामले से अलग कर दिया।
वहीं सीबीआई की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को गलत बताया जिसमें सीबीआई को बरामद सभी मूल दस्तावेज वापस करने का निर्देश दिया था।
सीबीआई ने मूल दस्तावेज सौंपने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दस्तावेज आरोपियों के बीच हुई साजिश व गठजोड़ का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। कुछ दस्तावेज पर पेंसिल से लिखा गया था और उसे रबर से मिटाया गया है।
सीबीआई ने तय नियमों का उल्लंघन कर छापेमारी की है।
इस मामले की जांच आरंभिक स्थिति में है और दस्तावेज की जांच से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मूल दस्तावेज देने से जांच प्रभावित होगी।
वहीं दिल्ली सरकार की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन व राहुल मेहरा ने सीबीआई के तर्क पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की छापेमारी को लेकर उसकी नीयत पर ही सवाल उठाया है। ऐसे में सभी मूल दस्तावेज वापस करने का फैसला सही है और सीबीआई की याचिका खारिज की जाए।
उन्होंने कहा कि सीबीआई राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। वह कुंठित इरादों, आधारहीन, अफसोसनाक तरीके से काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई प्रजातांत्रिक तरीके से चुनी गई लोकप्रिय सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर रही है।
ट्रायल कोर्ट ने 20 जनवरी को दिए फैसले में सीबीआई को फटकार लगाते हुए उसके कामकाज पर सवाल उठाया था। अदालत ने माना कि सीबीआई ने तय नियमों का उल्लंघन कर छापेमारी की है।