विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में लड़कियों के शोषण मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय में मासूम लड़कियों का यौन शोषण करने वाला बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित की कुछ महीने पहले ही गिरफ्तारी हो गई होती अगर दिल्ली पुलिस के सीनियर पुलिस अधिकारी मेहरबान नहीं होते।
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पुलिस नहीं करना चाहती थी बाबा की गिरफ्तारी
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baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
यह भी खुलासा हुआ है कि आश्रम से रात के समय लड़कियां बाहर जाती थीं। उन्हें होटल आदि जगहों पर गलत काम के लिए ले जाया जाता था। दिल्ली पुलिस के एक हवलदार ने लड़कियों को बाहर जाते देखा है।
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20 वर्ष से दिल्ली नहीं आ रहा है बाबा
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रोहिणी जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ महीने पहले एक लड़की की शिकायत पर विश्वविद्यालय संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। मामला दर्ज होने के बाद विजय थाना पुलिस ने आश्रम में कई बार दबिश दी।
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित
पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि उसी समय सीनियर पुलिस अधिकारियों का मैसेज आया कि बाबा वीरेंद्र देव को गिरफ्तार नहीं करना है। इसके बाद बाबा की गिरफ्तारी के प्रयास बंद कर दिए गए।
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इसके अलावा बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट दाखिल करने का भी दबाव था। लेकिन दुष्कर्म का मामला दर्ज हुए चार महीने से ज्यादा का समय हो गया पर पुलिस ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है।
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इस मामले में पीड़ित लड़की व उसकी मां के कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान हुए थे। कोर्ट में लड़की ने बाबा के पक्ष में बयान दिया था। लड़की नाबालिग थी, अत: पुलिस बाबा को गिरफ्तार कर सकती थी।
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दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस के एक हवलदार की लड़की भी आश्रम में है। हवलदार ने थाने में शिकायत नहीं की थी, मगर उसने रोहिणी जिले के पुलिस अधिकारियों को बताया था कि उसने कई बार देखा है कि लड़कियों को रात के समय आश्रम से बाहर ले जाया जाता है।
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उसे ऐसा लगता था कि वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों को बाहर ले जाया जाता है। पुलिस को जांच में लड़कियों से वेश्यावृति कराने के संकेत भी मिले हैं।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिसकर्मी जब आश्रम जाते हैं तो उन्हें ये जवाब मिलता है कि बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित करीब 20 वर्ष से दिल्ली नहीं आ रहे हैं। उन्हें बाबा की आध्यात्मिक बातें रिकॉर्ड कर सुनाई जाती हैं। पुलिस कई बार दबिश दे चुकी है पर बाबा नहीं मिले।