अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका
- फोटो : अमर उजाला
यूनिसेफ के फेयर स्टार्ट अभियान के अंतर्गत मंगलवार को अरावली की वादियों में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें यूनिसेफ की गुडविल एंबेसडर एवं मशहूर फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने 'अमर उजाला फाउंडेशन' से जुड़ी बेटियों के सवालों का जवाब दिया।
दिल्ली के इंपीरियल होटल में बैठकर प्रियंका ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए फरीदाबाद की बेटियों से बातचीत की। कार्यक्रम में प्रियंका से रूबरू हो कर सभी बच्चियां काफी उत्साहित नजर आयी।
पहली बार इस प्रकार का कार्यक्रम हुआ जिसमें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बच्चियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रियंका चोपड़ा से बातचीत करने का मौका मिला।
बच्चियों ने प्रियंका से पूछने के लिए खुद तैयार किए सवाल
लड़कियों के सवालों का जवाब देती प्रियंका चोपड़ा
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प्रियंका चोपड़ा ने बच्चियों के सवालों का उत्साहपूर्वक जवाब दिया और अपने बचपन के अनुभव भी साझा किए। इस दौरान फाउंडेशन की कुछ बच्चियों के अलावा फरीदाबाद के पांच स्कूलों की ११ छात्राएं भी मौजूद रहीं।
बच्चियों ने खुद तैयार किए सवाल, जवाब से संतुष्ट हुई छात्राएं
कार्यक्रम में प्रियंका चोपड़ा से सवाल पूछने के लिए पांच बच्चियों को चुना गया। इन बच्चियों ने समाज में बच्चों की अलग-अलग समस्याओं को ध्यान में रख कर अपने सवाल तैयार किए। कार्यक्रम में प्रियंका ने भी इन बच्चियों के सवाल पूरे ध्यान से सुने और उन्हें सरल भाषा में जवाब दिया।
बॉलीवुड़ अभिनेत्री से लड़कियों को मिली प्रेरणा
कार्यक्रम में सवाल पूछती लड़की
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कार्यक्रम के बाद 'अमर उजाला' से बातचीत में सभी छात्राओं ने अपनी खुशी का इजहार किया और सभी प्रियंका चोपड़ा के जवाब और उनके बातचीत के सलीके से प्रभावित दिखीं।
पूछे गए प्रश्न :
तमन्ना (विद्या मंदिर स्कूल) : अधिकांश घरों में देखा जाता है कि लड़कियों को बीच में ही पढ़ाई छोडऩी पड़ जाती है, जबकि लड़के पढ़ते रहते हैं।
प्रियंका चोपड़ा : ऐसा इसलिए होता है कि आज भी समाज में यह सोच व्याप्त है कि लड़कियों को बड़े हो कर शादी करके ससुराल जाकर घर संभालना है, वे पढ़ लिख कर क्या करेंगी। जबकि लड़का नौकरी करके घर का सहारा बनेगा। हमें यह सोच बदलनी होगी।
गीतांजली (सेंट कोलंबस) : आज भी घरों में बेटे-बेटियों के साथ भेदभाव होता है, लड़कियों को हर बात के लिए टोका जाता है, जबकि लड़के आजाद रहते हैं।
प्रियंका चोपड़ा : समाज का माइंड सेट हो चुका है, इसको बदलना जरूरी है। बेटियों को बेटों से कम न समझ कर पूरा मौका देना चाहिए। इसकी शुरुआत घर से ही होनी चाहिए, तभी बदलाव आ सकता है।