अलार्म का बटन दबाया तो उस पर भी मदद नहीं मिली। तब छात्रा ने अपने पिता को फोन कर लिफ्ट में फंसने की सूचना दी। पिता वेद प्रकाश ने बताया कि लिफ्ट में बिजली थी, लेकिन तकनीकी कारण से लिफ्ट रूकी थी। कैमरा लगा हुआ था, लेकिन कोई उस पर निगरानी नहीं रख रहा था। सुरक्षाकर्मी को लिफ्ट खोलनी नहीं आती है। लिफ्ट ऑपरेटर वहां मौजूद नहीं था। लिफ्ट ऑपरेटर को बुलाया गया। उसके बाद उसने लिफ्ट को खोला। इस सब में काफी समय लग गया। करीब 35 मिनट बाद उसकी बेटी को लिफ्ट से बाहर निकाला गया।
घटना से सहमी छात्रा नहीं गई कॉलेज
करीब 35 मिनट लिफ्ट में फंसने से छात्रा काफी सहम गई है। बाहर निकालने के बाद उसने कॉलेज जाने से इंकार कर दिया। लिफ्ट में फंसने के दौरान छात्रा काफी परेशान थी। वो अकेली थी तो काफी घबरा गई। पिता ने बताया कि मदद नहीं मिलने के कारण वो घबरा गई और रोने लगी। हाथ जोड़कर भगवान से जल्द मदद दिलाने की भी गुहार लगाई।
लिफ्ट का नहीं हो रहा रखरखाव
घटना के बाद से सोसाइटी के निवासियों में रोष है। उनका कहना है कि लिफ्ट का वार्षिक रखरखाव अनुबंध नहीं है। ऑपरेटर का कहना है कि चार माह पहले मेंटेनेंस हुआ था। बिल्डर ने भुगतान नहीं किया है। इस कारण रखरखाव नहीं किया जा रहा हैं। निवासियों का आरोप है कि बिल्डर मेंटेनेंस शुल्क लेने के बाद भी सुविधाएं नहीं दे रहा हैं। आए दिन लिफ्ट में फंसने की घटनाएं हो रही है। 10 दिन पहले निर्माणाधीन बिल्डिंग से सटरिंग गिरने से एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो चुकी है। निवासियों ने बिल्डर को प्रदर्शन की चेतावनी दी हैं।