29 दिसंबर को अचानक फिर उसकी तबीयत खराब हुई, तो फोन पर डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। 30 दिसंबर तक सतीश की तबीयत में कोई भी सुधार न होने पर वह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो इंफेक्शन की बात कहकर उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। 31 दिसंबर को डॉक्टर ने उसे कहीं ओर ले जाने की सलाह दी।
एक जनवरी को परिजन उसे लेकर मेरठ के प्राइवेट अस्पताल पहुंचे, वहां उन्हें सीटी स्कैन में पता चला कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने पित्त नलिकाओं को बिना सील किए छोड़ दिया, जिसके कारण संक्रमण फैल गया। 16 जनवरी को मेरठ से दिल्ली एम्स के लिए सतीश को रेफर किया गया। 18 जनवरी को उसकी मौत हो गई। सोमवार को पत्नी गरिमा व चार वर्ष की बेटी वंशिका के थाने पहुंची और अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दी। एसीपी सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई जायगी।
यह बोले सीएमओ
गाजियाबाद सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है, शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल के मालिक बोले- हमारे चिकित्सकों से नहीं हुई कोई गलती
श्री श्याम अस्पताल के मालिक विक्रांत चौधरी का कहना है कि अस्पताल से ऑपरेशन के बाद सतीश कुमार ठीक होकर अपने घर गए थे, अस्पताल के डॉक्टरों की कोई गलती नहीं है। सतीश के परिजनों ने उन्हें मेरठ के किसी अस्पताल में भर्ती कराया था, जो भी कुछ हुआ है वहीं से हुआ है।
मानक के अनुसार नहीं चल रहे हैं अस्पताल
मुरादनगर में जगह-जगह मुख्य मार्गों पर अस्पताल खुले हैं, जिनमें मानक के अनुसार कोई भी सुविधा मुहैया नहीं है। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों को इस ओर ध्यान नहीं है।