शिवशक्ति धाम बना छावनी
दरअसल, मेरठ के दीपक त्यागी की बरसी में जाने से रोकने के लिए शिवशक्ति धाम डासना को पुलिस ने छावनी बना दिया था। पुलिस ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी को नजरबंद कर दिया था। इसके बाद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने अपने खून से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। यह पत्र सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया जाना था।
नरसिंहानंद ने आरोप लगाया कि उनके शिष्य यति निर्भयानंद, यति रणसिंहानंद, यति असीमानंद और यति सत्यानंद को जबरदस्ती रोककर पुलिस ने जेल में डालने की धमकी दी। पुलिस अधिकारियों ने शिवशक्ति धाम में बुलडोजर चलाकर उजाड़ने को कहा। पुलिस अधिकारियों ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज को आशाराम बापू और राम रहीम बनाने की धमकी दी।
पुलिस की कार्रवाई से आक्रोशित हुए महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि उन्हें मारा या जेल में बंद किया जा सकता है, लेकिन उनकी आवाज को दबाया और उन्हें झुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि पुलिस की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के बारे में बताने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खून से पत्र लिखा था, लेकिन पुलिस ने ले जाने नहीं दिया। वहीं पुलिस ने आरोपों को निराधार बताया है।
हत्या के बाद थी दीपक त्यागी की बरसी
दीपक त्यागी हत्याकांड के एक साल होने पर परिजन यति नरसिंहानंद महाराज से मिलने गाजियाबाद पहुंचे थे। हत्याकांड के एक साल पूरे होने पर पुण्यतिथि पर पीड़ित परिवार ने शांति यज्ञ रखा। शांति यज्ञ में देशभर के साधु-संतों और हिंदुओं से भाग लेने की अपील की थी। इस यज्ञ में शामिल होने के लिए यति नरसिंहानंद महाराज जाने वाले थे, इसलिए पहले पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया।
मेरठ जिले में परीक्षितगढ़ के खजूरी गांव में 27 सितंबर 2022 को दूसरे संप्रदाय के लोगों ने दीपक त्यागी की निर्मम हत्या कर दी थी। पुलिस ने खजूरी गांव निवासी फैमीद को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। फैमीद गांव में झोपड़ी बनाकर अपने परिवार के साथ रहता था, जो मूलरूप से दौराला के पास सरसवा गांव का रहने वाला है। पिछले एक साल से पीड़ित का परिवार न्याय के लिए भटक रहा है।