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जी हां! कार्टून फिल्में देख-देख बिगड़ रहे बच्चे

Sun, 26 Feb 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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cartoons - फोटो : pinterest
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 कार्टून फिल्मों के लती बच्चों का मिजाज बिगड़ता जा रहा है। इसको लेकर अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। हॉट सिटी में कई अभिभावकों ने बच्चों की आदतें बिगड़ती देख कार्टून चैनल बैन कर दिए हैं। अभिभावकों की मानें तो कार्टून कैरेक्टर से इस कदर प्रभावित हो रहे हैं कि आम बोलचाल में भी वही डायलॉग इस्तेमाल कर रहे हैं।
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‘अमर उजाला’ ने रविवार को कुछ अभिभावकों से इस बाबत बातचीत की तो अधिकांश ने अपनी पीड़ा बयां की। अभिभावक नन्हे मुन्नों की भाषा और व्यवहार में होने वाले प्रतिकूल परिवर्तनों को कार्टून कैरेक्टर की देन मान रहे हैं। एक अभिभावक ने बताया कि घरों में बच्चे मां से कहते हैं कि ‘तुम कितना गंदा खाना बनाती हो, तुम खा-खा कर मोटी हो गई हो।’

लाडले के मुंह से ऐसी बातें सुनकर हैरत में पड़ जाते हैं, साथ ही भविष्य को लेकर सशंकित भी। वहीं, सवाल भी खड़ा करते हैं कि अब अगर कोई बच्चा मां से इस भाषा में बात करे तो क्या कहेंगे। साथ ही स्वीकार करते हैं कि बच्चों में जिद्दीपन और बड़ों से बदसलूकी तो आम होती जा रही है।
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हॉट सिटी के कई अभिभावकों ने तो यहां तक कहा कि बच्चों की बिगड़ती आदतों को देेखते हुए कार्टून चैनल बंद करा दिए हैं।

आक्रामक भी हो रहे बच्चे
पैरेंट्स काउंसलर्स के पास बच्चों की भाषा से जुड़ी समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक पहुंच रहे हैं। कार्टून कैरेक्टर्स का असर बच्चों पर इतना अधिक दिखाई दे रहा है कि कई बार बच्चे अपने साथी या फिर भाई-बहन के साथ आक्रामक भी हो जाते हैं।

पैरेंट्स का वर्किंग होना भी वजह
बच्चों की बिगड़ी भाषा की वजह पैरेंट्स का वर्किंग होना भी सामने आ रहा है। कुछ पैरेंट्स बच्चों को न सिर्फ कार्टून शो में व्यस्त रखना चाहते हैं, बल्कि उन्हें गैजेट फ्रेंडली भी बना रहे हैं। डोरेमॉन, शिन चैन, शिवा, जैसे कार्टून के पात्र बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

न चेते तो बढ़ेगी दिक्कत
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. सचिन भार्गव बताते है कि चार से आठ वर्ष के बच्चों में व्यवहार को लेकर मामले सामने आ रहे है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर परेशानी बढ़ सकती है। नौ और दस वर्ष के कुछ बच्चों को तो बिहेवियर थैरेपी तक देनी पड़ती है।     

(अभिभावकों की सुनिए)
बच्चों को कार्टून देखने की लत लग चुकी हैं। कार्टून देखने से उन्हें रोका नहीं जा सकता है। कार्टून कैरेक्टर की खराब आदतें बच्चे अपना रहे है।    
नूतन, निवासी वैशाली    

झूठ बोलना, बहाने बनाना और बड़ों को उल्टे-सीधे जवाब देना जैसी आदतें आ गई है। डांटने पर बच्चे हमें उल्टा जवाब देते हैं। बच्चों को कार्टून देखने पर रोक लगाने की कोशिश कर रही हैं।
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अनीता शुक्ला, निवासी वसुंधरा    


यह नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे बच्चों पर     
-कैरेक्टर के बातचीत का तरीका    
- अडियल व्यवहार     

- कपड़े पहनने का तरीका    
- दोस्तों के साथ होने वाला व्यवहार     

- अभिभावकों की बात न मानना    
- ऊंचाई से कूदना     

- अपनी बात मनवाने के लिए जिद करना   
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