सेक्टर-7 और 8 की प्रस्तावित योजनाओं में सस्ते घर के लिए सोच रहे लोगों का सपना टूटता नजर आ रहा है। आवास विकास परिषद अधिकारियों ने एक बार फिर वसुंधरा योजना के इन दोनों सेक्टरों का ले-आउट बदलने का निर्णय लिया है।
सूत्रों की मानें तो जमीन पर प्रस्तावित सभी ग्रुप हाउसिंग का निर्माण बिल्डरों को सौंपने का निर्णय लिया गया है। तीन साल से अटका ले-आउट जल्द ही फाइनल होने वाला है।
सेक्टर-7 और 8 की 102 एकड़ जमीन पर आधा दर्जन से ज्यादा ग्रुप हाउसिंग स्कीम प्रस्तावित हैं।
इस जमीन का ले-आउट तीन बार बदला जा चुका है। आखिरी बार 2013 में जमीन पर बने फार्म हाउस के नक्शे में कुछ गड़बड़ी होने के कारण इसका ले-आउट बदला गया था। अब परिषद ने ले-आउट पास करने के साथ ही सभी ग्रुप हाउसिंग स्कीम बिल्डरों को देने का निर्णय लिया है।
आवास आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि फिलहाल ले-आउट पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से होगा। इसके बाद ही जमीन की नीलामी आदि पर विचार किया जाएगा। ग्रुप हाउसिंग स्कीम के प्लॉट निजी बिल्डरों को बेचे जाएंगे।
स्टेडियम, अस्पताल और अन्य सुविधाएं भी होंगी बिल्डरों के हवाले
परिषद अधिकारियों का कहना है कि यहां बनने वाले स्टेडियम और अस्पताल के लिए किसी भी सरकारी संस्था ने रुचि नहीं दिखाई है। योजना के शुरुआती ले-आउट में अस्पताल और स्टेडियम के लिए प्लॉट छोड़े गए थे। इसमें यह निर्णय नहीं हुआ था कि ये सरकारी होंगे या प्राइवेट। ऐसे में इनको निजी बिल्डरों के हवाले भी किया जा सकता है।
आम आदमी से घर होगा दूर
परिषद की ओर से तैयार मेट्रो के प्रस्ताव में सेक्टर-8 में ही मेट्रो स्टेशन दिखाया गया है। ऐसे में अगर यहां निजी बिल्डर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट तैयार करते हैं, तो यह आम आदमी की पहुंच से बेहद दूर होगा।