कैंसर पीड़ित बच्चों के साथ मां।
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कैंसर पीड़ित बच्चों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगी आसमां की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को डॉक्टर ने उन्हें बताया कि जब तब बच्चों का खून बदलता रहेगा, तब तक ही वे जीवित रह सकेंगे।
यह बेहद गंभीर बीमारी है। इसका कोई इलाज भी नहीं है। बता दें कि एक बार में खून बदलवाने में एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। नया नूरगंज कालोनी निवासी आसमां ने बताया कि वह अपने बच्चों को लेकर फिर एम्स में गई थीं।
वहां से बच्चों का ब्लड टेस्ट कराने के लिए उन्हें अपोलो अस्पताल भेज दिया गया। यहां बच्चों के अलावा आसमां के भी खून के नमूने लिए गए। डॉक्टर ने आसमां को बताया कि बच्चों की बीमारी का खून बदलने के सिवाय और कोई इलाज नहीं है।
आसमां का कहना है कि गरीबी से जूझ रहे परिवार पर यह किसी आफत से कम नहीं है। सरकार की ओर से मंजूर किए गए छह लाख रुपये भी अभी उन्हें नहीं मिले हैं। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि कैसे बच्चों का इलाज कराएं।
प्रशासन की बेरुखी ने बढ़ाई मुसीबत
जानलेवा बीमारी से कैस (4) और कैफ (2) की जिंदगी बचाने की जंग में प्रशासन की बेरुखी भारी पड़ रही है। आसमां कहती हैं कि बच्चों को दिल्ली लाने ले जाने में होने वाला खर्च तो वह किसी तरह वहन कर रही हैं लेकिन खून बदलवाने के लिए तीन लाख रुपयों का इंतजाम करना उनके बूते की बात नहीं है।
कर्जा लगातार बढ़ता जा रहा है। सीएम की ओर से मंजूर किए गए रुपये भी उन्हें नहीं मिले हैं। दिल्ली की एनजीओ ही अभी तब बच्चों के इलाज में मदद कर रही है। एसडीएम अतुल कुमार का कहना है कि बच्चों की बीमारी संबंधी कोई भी मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बुधवार को लेखपाल को पीड़िता के घर भेजा जाएगा।