सीनियर कंसल्टेंट डा. राजीव शर्मा ने बताया कि चिकनगुनिया होने पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। डेंगू की तरह इसमें जान जाने का खतरा नहीं है। एक सप्ताह में बुखार उतरने के बाद जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द महीनों तक रह सकता है। बुजुर्गों को चिकनगुनियार से जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द छह महीने तक रह सकता है।
युवाओं में इतने लंबे समय तक जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द नहीं रहता है। डा. विनय अग्रवाल ने कहा कि चिकनगुनिया खतरनाक नहीं है। सावधानी बरतने से इसके मरीजों की संख्या को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। चिकनगुनिया के मरीजों को अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए। चिकनगुनिया से घबराइए नहीं, ये बीमारी जानलेवा नहीं है।
ज्यादातर मरीजों को एक सप्ताह में ही चिकनगुनिया से आराम मिल जाता है। नवजात शिशुओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। साथ ही डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और हार्ट के मरीजों को चिकनगुनिया होने पर अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है।
एडीज इजिप्टी ही देता है चिकनगुनिया
डेंगू और चिकनगुनिया देने वाला मच्छर एक ही है, इसका नाम है एडीज एजिप्टी। ये मच्छर साफ पानी में पैदा होता है और अमूमन दिन में ही काटता है, लेकिन कमरे में अधिक रोशनी होने पर रात में भी काट सकता है। एडीज मच्छर का लारवा पनपने से रोककर लोगों को चिकनगुनिया की चपेट में आने बचाया जा सकता है।
डा. सुनील डागर ने बताया कि प्रारंभिक लक्षण बुखार और जोड़ों में दर्द हैं, लेकिन कुछ मरीजों में मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में सूजन, भूख नहीं लगना, प्रकाश सहन नहीं होना और शरीर पर चक्कते निकलना भी सामने आता है।
बरतें एहतियात
1. घर या आसपास पानी नहीं जमा होने दें।
2. कूलर का पानी हर सप्ताह बदल दें।
3. गमलों और गड्डों में पानी जमा नहीं होने दें।
4. फॉगिंग कराकर एडीज मच्छर से बचें।
5. हाथ-पैर को ढककर रखें, जिससे मच्छर न काटें।